पटना। संत जोसेफ कॉन्वेंट हाई स्कूल का परिसर शनिवार को सुर, लय, ताल और सांस्कृतिक रंग की छठा से मुखरित हुआ। छात्राओं की प्रस्तुत नेे शहर के सांस्कृतिक फलक में एक नया निखार भर दिया। मौका था स्कूल के 161वें वार्षिकोत्सव का। इस अवसर पर राज्य शिक्षा मंत्री वृषिण पटेल ने मुख्य अतिथि के तौर पर कार्यक्रम में शामिल हुए। अतिथियों का स्वागत स्कूल की प्राचार्या सिस्टर लूसिना ने किया। इस अवसर पर स्कूल की निदेशिका सिस्टर विमला, संत माइकल हाई स्कूल के प्राचार्य फादर पीटर, प्राइवेट स्कूल एंड चिल्ड्रन वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष शमायल अहमद आदि लोग उपस्थित थे।
पद ताल और घुंघरू की जुगलबंदी
माथे पर गजरा, आखों में कजरा और पैरों में घुंघरु। कभी तालबद्ध पदचाप तो कभी विहंगम चक्कर। प्रेरणा शंकर, कृषिका, दीपश्री, सिमरन, भव्या, अचिंत्य, अनुष्का और शांभवी ने जब जगाबे सारी रैना... पर कथक की प्रस्तुति दी तो पूरा परिसर हर्ष ध्वनि से गूंज उठा। छात्राओं ने कभी प्रेम रस का संचार किया तो कभी श्रृंगार रस का। चेहरे की भाव-भंगिमा और हाथों की मुद्राओं ने सबका ध्यान आकर्षित किया। पद ताल और घुंघरू की जुगलबंदी ने सबका मन मोहा।
नारी शक्ति का प्रदर्शन
छात्राओं ने कार्यक्रम में नारी शक्ति को सलाम किया। हम होंगे कामयाब... गीत की सामूहिक प्रस्तुति में नारी के सशक्त चेहरे को दर्शाया। रानी लक्ष्मीबाई, मदर टेरेसा, इंदिरा गांधी, किरण वेदी और मेरी कॉम के रूप में छात्राएं मंच उपस्थित हो नारी शक्ति का प्रदर्शन किया। इस अवसर पर हिंदी नाटक ‘भटकन’ और अंग्रेजी नाटक ‘मंकी पॉ’ का मंचन किया। इस अवसर पर शिक्षिका प्रेमा दिव्या, पूजा वर्मा, संघमित्रा बैनर्जी, रेखा सिंह, तब्बसुम, श्वेता प्रसाद, मिस मेरी, निरूपम, अलीषा, अभिभावकगण और छात्राएं आदि उपस्थित थे।
मुख्य अतिथि ने कहा...
मुख्य अतिथि वृषिण पटेल ने अपने संबोधन में कहा कि आज लड़कियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं है। वह न सिर्फ प्रोफेशनल दुनिया में आगे हैं बल्कि परिवार की जिम्मेदारियों को भी बखूबी निभा रही हैं। उनकी दोहरी जिम्मेदारी यह प्रदर्शित करती है कि आने वाला कल उनका है।
दिल में उतरा सूफी का रंग
जब अपूर्वा, ईशा वैदेही, नेहा चौधरी, सोनल सहित कई छात्राओं ने अल्लाह की शान में सूफी कब्बाली कुन फाया कुन... गाया, श्रोताओं ने रूहानी सुकून महसूस किया। दिल में उतरने वाली सुरीली आवाज नेे सुनने वालों का रोम-रोम पुलका दिया। वहां उपस्थित लोगों ने सूफिज्म की सुंदरता और आध्यात्मिकता के रस में खूब डुबकी लगाई।