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डाउनलोड करेंपटना. केन्द्र सरकार ने बिहार के बांका के ककवारा में अल्ट्रा मेगा पावर प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है। 4000 मेगावाट क्षमता के इस प्रोजेक्ट में से आधी बिजली बिहार को मिलेगी। केन्द्रीय ऊर्जा राज्य मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बुधवार को बिहार के ऊर्जा मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव को पत्र भेजकर इसकी सूचना दी है। नोडल एजेंसी पावर फाइनेंस कारपोरेशन से विमर्श के बाद यह निर्णय लिया गया है।
सीईए पहले ही दे चुका है मंजूरी: अल्ट्रा मेगा पावर प्रोजेक्ट को केन्द्रीय विद्युत प्राधिकार (सीईए) की हरी झंडी पहले ही मिल चुकी है। सहमति के पहले टेक्नो-इकोनॉमिक पहलुओं को आधार बनाया गया है। पिछले दिनों केन्द्रीय विद्युत प्राधिकार व पावर फाइनेंस कारपोरेशन (पीएफसी) की टीम ने राज्य सरकार के अधिकारियों के साथ बांका के ककवारा और नवादा के रजौली का स्थल निरीक्षण किया था।
टीम ने अपनी रिपोर्ट में बांका में अल्ट्रा मेगा पावर प्रोजेक्ट पर सहमति जाहिर करते हुए कहा था कि वह स्थान अल्ट्रा मेगा पावर प्रोजेक्ट के लिए उपयुक्त है। उसके अनुसार यहां न जमीन की समस्या है और न ही पर्यावरण या फिर अभयारण्य से संबंधित बाधाएं हैं। राज्य सरकार परियोजना के लिए पानी की व्यवस्था पहले ही कर चुकी है।
पावर सेक्टर में नई शुरुआत, बिजली संकट दूर होगा
गत वर्ष 28 नवम्बर को हमने केन्द्रीय ऊर्जा मंत्री को इस संबंध में पत्र लिखा था। उन्होंने स्वीकृति की सूचना दी है। हम आत्मनिर्भरता से आगे सरप्लस स्टेट होने की ओर बढ़ रहे हैं।
बिजेन्द्र प्रसाद यादव ऊर्जा मंत्री, बिहार
यह राज्य के पावर सेक्टर में नई शुरुआत के रूप में देखा जाएगा। इस परियोजना के बाद निश्चित रूप से बिहार को बिजली संकट दूर होगा। हम तो इसके निर्माण पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं।
अजय वी. नायक, ऊर्जा व जल संसाधन विभाग के तत्कालीन प्रधान सचिव
28 हजार करोड़ खर्च
2500 एकड़ जमीन
20 लाख टन कोयला
120 क्यूसेक पानी की जरूरत होगी
फिलहाल बिहार में 2000 से 2200 मेगावाट बिजली उपलब्ध है
हमारी जरूरत 2500 से 3000 मेगावाट की है
चल रही हैं ये परियोजनाएं
बरौनी : यहां 110 मेगावाट की दो यूनिटें थीं। इन्हें चालू किया जा रहा है और क्षमता 250 मेगावाट तक बढ़ाई जा रही है।
कांटी : यहां भी 110 मेगावाट की दो यूनिटें थीं। इनकी क्षमता 195 मेगावाट की जा रही है।
नवीनगर : 660 मेगावाट की तीन नई यूनिटें लगाई जा रही हैं।
बाढ़ : यहां फेज वन में 660 मेगावाट की तीन और फेज दो में 660 मेगावाट की दो यूनिटें लग रहीं हैं।
आगे क्या
अल्ट्रा पावर प्रोजेक्ट के लिए अभी कोयला मंत्रालय की मंजूरी बाकी है। सबसे बड़ी चुनौती यही है। हालांकि कोल ब्लाक के लिए कोल मंत्रालय को अनुरोध किया जा चुका है।
कोयला मंत्रालय की मंजूरी के बाद यह परियोजना पूरी होने के करीब चार लगने का अनुमान है।
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