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डाउनलोड करेंपटना. बैरिया डंपिंग यार्ड में पड़े कचरे को छांट कर बिजली और खाद बनाने की योजना है। फिलहाल लैंड फिल साइट की योजना है। यार्ड में गड्ढा खोदकर उसमें कचरे को डाला जाएगा। उसके ऊपर मिट्टी डाली जाएगी। कीटनाशक दवाओं का भी नियमित छिड़काव होगा, ताकि आसपास के लोगों को स्वच्छ और सुंदर वातावरण मिल सके। इसके लिए चिह्नित की गई जमीन पर पौधे लगाए जाएंगे।
यह जानकारी प्रधान अपर महाधिवक्ता ललित किशोर ने हाईकोर्ट को दी है। सुनवाई न्यायमूर्ति इकबाल अंसारी तथा समरेन्द्र प्रताप सिंह की खंडपीठ ने की। अगली सुनवाई 10 मार्च को होगी। उस दिन की गई कार्रवाई का ब्योरा कोर्ट को देना होगा।
बैरिया डंपिंग यार्ड में कचरे के अंबार के कारण दिन-रात बदबू और धुआं निकलता रहता है। इससे दो किलोमीटर के एरिया में रहने वाली करीब एक हजार से अधिक आबादी प्रभावित है। रामाचक, मरचा-मरची, कछुआरा, इलाहीबाग आदि इलाके के लोग परेशान हैं।
अभी ये है स्थिति
72 एकड़ जमीन का अधिग्रहण हुआ है प्लांट बनाने के लिए
72 एकड़ जमीन का अधिग्रहण हुआ है प्लांट बनाने के लिए
2010 से यहां कचरा डंप हो रहा है
08 मिट्रिक टन कचरा हर दिन यार्ड में डंप होता है
2.50 लाख से अधिक घर हो सकते हैं रोशन
पटना में हर दिन 1100 मिट्रिक टन कचरा निकलता है। इससे 10 मेगावाट बिजली व 175 मिट्रिक टन खाद बनायी जा सकती है। हर घर में औसतन तीन-चार किलोवाट तक की बिजली खपत होती है। दस मेगावाट बिजली से 2.50 लाख से अधिक घरों में रोशनी पहुंच सकती है। अभी हरियाणा के सोनीपत में ऐसा प्लांट है, जहां कचरे से खाद बनाई जाती है।
बुडको को जिम्मा
बैरिया यार्ड में लैंड फिल साइट के तहत कूड़े से बिजली व खाद बनाने की योजना है। इसके लिए केंद्र सरकार से एनओसी मिल चुका है। बुडको को इसकी जिम्मेदारी दी गई है।
शंशाक शेखर, डिप्टी कमिश्नर
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