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डाउनलोड करेंपटना. बिहार के अपूर्व किरण ने अमेरिका के कॉर्नेल यूनिवर्सिटी में थ्रीडी प्रिंटर से स्पीकर बनाया है। अपूर्व ने यह प्रिंटर कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के मैकेनिकल एंड एयरोस्पेस इंजीनियरिंग विभाग में बनाया। तीन साल से अमेरिका में पढ़ाई कर रहे अपूर्व इस प्रोजेक्ट में एक साल से लगे थे। भास्कर से विशेष बातचीत में उन्होंने बताया स्पीकर को बनाने में करीब 400 रुपए लगे। स्पीकर को बनाने वाले थ्रीडी प्रिंटर को अगर भारत में बनाए तो कीमत करीब पांच हजार रुपए आएगी। जबकि अमेरिका में प्रिंटर की कीमत 50 हजार रुपए है।
अगला प्रोजेक्ट
अभी मैं और मेरी टीम थ्रीडी प्रिंटर बनाने का प्रयास कर रहे हैं। साथ ही दीवार पर चिपकने वाली मशीन भी बना रहे हैं। इसे हम इलेक्ट्रोएढ़ीसन डिवाइस कहते हैं। यह छिपकली की तरह किसी भी सतह पर चिपक जाती है। सिर्फ स्विचऑन करने की देर है।
आम प्रिंटर की तरह है थ्रीडी प्रिंटर
थ्रीडी प्रिंटर आम प्रिंटर की तरह ही काम करता है। हम साधारण प्रिंटर में अलग-अलग रंग की स्याही डालते हैं। वहीं थ्रीडी प्रिंटर में अलग-अलग तरह की वस्तुएं डालते हैं। इन वस्तुओं की डिजाइन कंप्यूटर में बनाई जाती है। फिर प्रिंट कमांड देकर उन्हें बाहर निकाल लेते हैं।
अमेरिका में मौके कम, देश में खोलूंगा कंपनी
मैं अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद अपने देश में कंपनी खोलूंगा। क्योंकि अमेरिका में अपॉच्र्यूनिटी कम है। जो काम मैं कर रहा हूं उस काम को लेकर भारत में उम्मीद ज्यादा है। मैं लोगों को सस्ती कीमत पर चीजें मुहैया कराऊंगा।
हमारे लिए बड़ी चुनौती थी वस्तुओं का चयन
स्पीकर प्लास्टिक बॉडी, कंडक्टिव क्वायल व चुंबक की मदद से बनता है। चुनौती ये थी कि डिजाइन और प्रिंट के लिए उसी क्षमता के वस्तुओं को प्रिंटर से निकालना। कंडक्टर के लिए सिल्वर इंक और चुंबक के लिए स्ट्रॉन्टियम फेराइट का उपयोग किया।
स्पीकर बनाने के बाद हमने उससे अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा का भाषण सुना। स्पीकर ने बेहतरीन काम किया। इस काम में मुझे विभाग के प्रोफेसर हॉड लिपसन, शोधार्थी रॉबर्ट मैककर्डी और केमिकल-बायोमॉलिक्यूलर विभाग के समन्वय श्रीवास्तव ने मदद की।
जानिए अपूर्व को
पीएचडी, कॉर्नेल यूनिवर्सिटी, न्यूयॉर्क अमेरिका।
एमएससी, आईआईएस, बेंगलुरु।
बीटेक, आईआईटी, मद्रास।
परिवार : बेगूसराय के बरौनी रेलवे स्टेशन के पास रहता है।
पिता : चंद्रभानु प्रसाद सिंह, ललित नारायण मिथिला यूनिवर्सिटी, दरभंगा में हिंदी के प्रोफेसर हैं।
मां : किरण, हाउसवाइफ हैं।
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