पटना: मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी का कहना है कि मुख्यमंत्री पद पर रहने के दौरान मधुबनी के एक मंदिर में उनके पूजा करने के बाद मंदिर की मूर्ति धुलवाई गई थी। मांझी के मुताबिक, उन्हें इस बारे में उनके ही एक मंत्री ने जानकारी दी थी। हालांकि, मंत्री का कहना है कि उन्होंने ऐसा कुछ नहीं बताया था।
पूर्व मुख्यमंत्री भोला पासवान शास्त्री की जयंती पर आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री ने रविवार को कहा, "मैं बिहार विधानसभा उपचुनाव के सिलसिले में मधुबनी गया था। बड़े शौक से लोग मुझे एक मंदिर में ले गए। यह बात हमको पता नहीं थी, पर बाद में रामलखन राम रमण (जेडीयू नेता और खनिज मंत्री) ने बताया कि आपके जाने के बाद मूर्ति धुलवाई गई । जरा सोचिए कहां हैं हम। जब लोग काम के लिए हमारे पास आते हैं, तो पैर छूकर प्रणाम करते हैं, लेकिन उनके दिल में क्या बसा है, उसका अंदाजा मुझे उसी घटना से लगा। मुझे आज भी दलित समझा जाता है।"
जेडीयू ने किया घटना से इनकार
खनन मंत्री राम लखन सिंह ने कहा, ''मुख्यमंत्री को इस बारे में मैंने कोई जानकारी नहीं दी है। बेवजह इस प्रकरण में मेरा नाम आया। मुख्यमंत्री ने प्रसंगवश मेरा नाम ले लिया। मैं तो यह भी नहीं जानता कि मुख्यमंत्री किस मंदिर की बात कर रहे हैं। हो सकता है कि मुख्यमंत्री को किसी तीसरे व्यक्ति ने इसकी सूचना दी होगी। जिस समय मंच पर मुख्यमंत्री के साथ मैं बात कर रहा था, उस समय पूर्व सांसद महेश्वर हजारी व सुखदेव पासवान भी वहां मौजूद थे। ऐसी कोई बात मैंने नहीं की।''
पार्टी के एमएलसी विनोद सिंह ने कहा, ''मूर्ति धुलवाने जैसी कोई घटना नहीं हुई थी। मुख्यमंत्री 18 अगस्त को अंधराठाढ़ी के परमेश्वरी मंदिर में पूजा करने गए थे। रमण तो वहां थे भी नहीं। मंदिर में मैं और ग्रामीण विकास मंत्री नीतीश मिश्रा थे। रमण को किसी व्यक्ति ने गलत जानकारी दी होगी। लेकिन उन्हें मुख्यमंत्री को बताने के बजाए इसकी जांच करानी चाहिए थी। मैं दुर्गापूजा के बाद पटना आने पर मुख्यमंत्री को सच्चाई से अवगत कराऊंगा।''
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