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  • केसरीनाथ त्रिपाठी ने नीतीश कुमार के आरोपों पर जवाबी हमला किया है

बहुमत विवाद पर बोले गवर्नर-48 घंटे में सीएम बदलना चाहते थे नीतीश

6 वर्ष पहले
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पटना. मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने कहा है कि मुझे कठपुतली समझ कर महानुभाव नीतीश कुमार ने गलती नहीं, महागलती की है। उन्हें अपने शब्द सुधार लेने चाहिए। शुक्रवार को मुख्यमंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा कि नीतीश समझ रहे थे कि मैं रबर स्टैम्प की तरह काम करूंगा और रिमोट से चलूंगा। मैं दो महीने तक रिमोट से चलता रहा लेकिन जब यह बात प्रचारित होने लगी तब मैंने स्वतंत्र रूप से फैसले लेना शुरू कर दिया।
मांझी ने कहा-तब नीतीश ने मेरा विरोध करना शुरू कर दिया। वे खुद तो चुप रहे लेकिन अपने लोगों से गाली दिलवाने लगे। नीतीश की चुप्पी हमें जलील करती रही। शरद यादव मेरे पास आए थे और उन्होंने कहा कि आप मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार का नाम प्रस्तावित करें और खुद इस्तीफा दें। मैंने इससे इनकार कर दिया। इसके बाद मेरी नीतीश से आमने-सामने बात भी हुई, लेकिन वह चुप रहे। इसी के कारण मैंने कहा कि नीतीश भीष्म पितामह की तरह चुप बैठे हैं, जिसके कारण बिहार में महाभारत हो रहा है।
गवर्नर बोले- नीतीश कुछ भी बोलने के लिए आजाद
बिहार के राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी ने नीतीश कुमार के आरोपों पर जवाबी हमला किया है। केशरीनाथ त्रिपाठी ने कहा है कि नीतीश कुमार कुछ भी बोलने के लिए स्वतंत्र हैं। त्रिपाठी ने कहा, "लोग बहकावे में न आएं। नीतीश चाहते थे कि 48 घंटे में मुख्यमंत्री को बदल दिया जाए। यह जनवरी में ही यह तय हो गया था कि 20 फरवरी से दोनों सदनों का सत्र बुलाया जाएगा। नीतीश ने 9 फरवरी को सत्र बुलाने की मांग की थी। हमने 11 फरवरी को फैसला ले लिया। दो दिनों में क्या देरी हो गई जो नीतीश राजनीतिक बयानबाजी करने लगे।"
इससे पहले बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यपाल पर हमला करते हुए कहा था कि भाजपा और राज्यपाल संसदीय लोकतंत्र की हत्या करने की कोशिश कर रहे हैं। हमें उम्मीद थी कि राज्यपाल विशेष परिस्थिति में विशेष निर्णय लेंगे। लेकिन उन्होंने मांझी को लंबा समय देकर हॉर्स ट्रेडिंग का मौका दिया है।

गुप्त मतदान का नियम नहीं, लॉबी डिवीजन से होगा बहुमत का फैसला
राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी ने मांझी को 20 फरवरी को विश्वास मत हासिल करने को कहा है। राज्यपाल ने दो सुझाव दिए हैं। लॉबी डिवीजन हो या गुप्त मतदान। गुप्त मतदान होना संभव नहीं, क्योंकि विधानसभा प्रक्रिया और कार्य संचालन नियमावली के नियम 56 के तहत गुप्त मतदान का नियम नहीं है। यानी लॉबी डिवीजन से फैसला होगा।
कैसे होता है लॉबी डिवीजन
सदन में प्रस्ताव के पक्ष में हां और ना के निर्धारण के लिए स्पीकर सचिव को 3 मिनट विभाजन घंटी बजाने का निर्देश देंगे। फिर लॉबी से सदन में आने के प्रवेश द्वार बंद किए जाएंगे। अध्यक्ष 'हां' और 'ना' पक्ष वालों को सदन से सटी लॉबी में जाने का निर्देश देंगे। हर पक्ष के लिए अधिकतम दो गणक नियुक्त होंगे। ये हस्ताक्षर लेंगे। सदस्य सदन में आएंगे। फिर स्पीकर रिजल्ट की घोषणा करेंगे।
आगे की रणनीति
जदयू ने विपक्ष में बैठने की ठानी है। यानी तीन मंत्री विपक्ष में गिने जाएंगे। उनपर व्हिप लागू होगा। अनदेखी पर सदस्यता जाएगी। मांझी ने श्रवण कुमार के रहते राजीव रंजन को मुख्य सचेतक बना दिया है। हालांकि, विधानसभा ने उन्हें अधिसूचित नहीं किया है। ऐसे में, राजीव की व्हिप की वैधता सवालों के दायरे में है।
मांझी को दो-तीन माह ऐसे ही छोड़ देते, तो क्या हम बच पाते : नीतीश
पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि मांझी को दो-तीन माह ऐसे ही राज करने के लिए छोड़ देते तो क्या हम बच पाते? मांझी जिस तरह भाजपा के एजेंडा पर चलने लगे, वह मेरे लिए सदमे से कम नहीं है। जिस पर मैंने भरोसा किया, वह कैसा निकल गया। गुरुवार को दिल्ली से पटना पहुंचने के बाद नीतीश ने कहा, "मांझी के पार्टी तोड़कर भाजपा में जाने की आशंका थी। भाजपा की चाल है, मांझी से गलत काम कराओ और बदनामी का ठीकरा मेरे माथे फोड़ दो। बिहार में राष्ट्रपति शासन लगाने का प्लेटफार्म तैयार हो रहा है। मैं भाजपा की चाल को नाकाम कर दूंगा।"
स्पीकर को कोई छूकर देखे
स्पीकर उदय नारायण चौधरी के बचाव में उतरे नीतीश ने कहा कि हिम्मत है तो कोई स्पीकर को छूकर देखे, पता चल जाएगा। दिन भर चर्चा होती रही कि गिरफ्तार किया जाएगा। कर ले लोग स्पीकर को गिरफ्तार, समझ में आ जाएगा कानून किसे कहते हैं?
मोदी पर भी निशाना
नीतीश ने कहा कि सारा खेल प्रधानमंत्री मोदी करा रहे हैं। दोनों में कैसी मुलाकात थी कि एक फोटो भी जारी नहीं हुआ। उनसे मिलने के बाद मांझी ने जोड़-तोड़ शुरू कर दिया है।
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