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डाउनलोड करेंपटना. बुधवार को सीबीआई के विशेष कोर्ट ने पूर्व आईजी रामचंद्र खां को एक दिन की न्यायिक हिरासत पर भेज दिया है। कल इनकी जमानत याचिका पर सुनवाई होगी। अस्सी के दशक में हुए वर्दी घोटाले में सीबीआई ने मंगलवार को बिहार के पूर्व आईजी रामचंद्र खां को पटना में गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद सीबीआई की टीम उन्हें रांची लेकर गई। कल इनकी जमानत याचिका पर सुनवाई होगी। साथ ही रिम्स में इनका मेडिकल चेकअप कराया जाएगा। वर्ष 1983-84 के बीच हुए 44 लाख के वर्दी घोटाले में वह आरोपी हैं।
इस मामले की सुनवाई रांची स्थित सीबीआई की विशेष अदालत में चल रही है। पूर्व आईजी जमानत पर थे। लेकिन सुनवाई के क्रम में वे अदालत में पेश नहीं हुए। कोर्ट ने इसे गंभीरता से लिया और उनकी जमानत रद्द कर दी। साथ ही पिछले वर्ष उनकी गिरफ्तारी के लिए वारंट भी जारी किया था। उनके फरार रहने से 28 वर्ष पुराने मामले की सुनवाई रुक गई थी।
तय दर से अधिक पर हुई थी वर्दी की खरीद
बिहार में पहले सिपाहियों को वर्दी दी जाती थी। वर्दी की खरीद के लिए सेंट्रल पर्चेज कमेटी थी। 1980 के बाद बीएमपी के कमांडेंट स्तर के अफसरों को यह अधिकार दिया गया था कि अगर वर्दी की कमी हो तो वे अपने स्तर से भी बाजार से खरीद सकते हैं।
वर्ष 1983 से 84 के बीच ऐसी खरीदारी की गई जिसमें स्वीकृत दर से अधिक पर वर्दी की खरीद की गई थी। उस दौरान रामचंद्र खां एआईजी बजट के पद पर तैनात थे।उन्होंने इस खरीद को मंजूरी दी थी। मामला सामने आने के बाद सरकार ने 1986 में जांच सीबीआई को सौंप दी। काफी समय तक जांच के बाद रामचंद्र खां सहित 9 लोगों को सीबीआई ने आरोपी बनाया था।
सीबीआई ने 34 लाख की हेराफेरी पकड़ी
सीबीआई ने भादवि की धारा 120 बी, 420 और 468 के तहत केस दर्ज किए थे। जांच में 34 लाख की हेराफेरी पकड़ी थी। सिर्फ दस लाख की ही वर्दी की खरीददारी के प्रमाण मिले। जबकि खरीद 44 लाख की दिखाई गई थी।
दो पूर्व डीजीपी बने थे गवाह
1983-84 में बिहार में वर्दी घोटाला हुआ था।
13 मार्च 1986 को बिहार सरकार ने सीबीआई जांच की अनुशंसा की थी।
1996 में चार्जशीट दायर। पूर्व आईजी रामचंद्र खां के खिलाफ बिहार के पूर्व डीजीपी एके पांडेय और झारखंड के पूर्व डीजीपी नेयाज अहमद ने गवाही दी थी।
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