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39 साल बाद पूर्व रेलमंत्री की हत्या के मामले में दोषियों को आज मिलेगी सजा

7 वर्ष पहले
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फाइल फोटो: पूर्व रेलमंत्री ललित नारायण मिश्र।

नई दिल्ली/पटना.
पूर्व रेलमंत्री ललित नरायण मिश्रा की हत्या मामले में दिल्ली की कड़कड़डूमा अदालत ने दोषियों को सजा देने की तारीख आगे बढ़ा दी है। कोर्ट आज दोषियों को सजा सुनाने वाली थी। आठ दिसम्बर को अदालत ने आरोपी रंजन दिवेदी, गोपालजी, संतोषानंद और सुदेवनंद को हत्या मामले में लिप्त पाया और दोषी ठहराया था। जिला जज विनोद गोयल ने करीब चालीस साल से लंबित इस मामले पर फैसला सुनाते हुए सजा पर बहस की तारीख 15 दिसंबर तय की थी। अब 18 दिसम्बर को सजा का एलान होगा।

क्या है पूरा मामला
दो जनवरी 1975 को बिहार के समस्तीपुर रेलवे स्टेशन के पास आयोजित समारोह में हुए बम धमाके में पूर्व रेलमंत्री ललित नारायण मिश्रा गंभीर रूप से घायल हो गए थे। तीन जनवरी को उनकी मौत हो गई थी। मामले में 200 से अधिक गवाह थे। इस हत्याकांड में अभियोजन पक्ष की ओर से संतोषानंद अवधूत, सुदेवनंद अवधूत, रंजन द्विवेदी और गोपालजी को आरोपी बनाया गया था। अभियोजन पक्ष की ओर से 161 और बचाव में 40 गवाहों को अदालत में पेश किया गया था। सीबीआई ने पटना में एक नवंबर 1977 को मामले की चार्जशीट दायर की थी।1979 में सुप्रीम कोर्ट ने मामले को दिल्ली की कड़कड़डूमा अदालत में स्थानांतरित कर दिया था। आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट से अपने खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर को रद्द करने की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने 17 अगस्त, 2012 को आरोपियों की मांग खारिज कर दी थी। कड़कड़डूमा कोर्ट में सितंबर 2012 में मामले की सुनवाई शुरू हुई थी।
घटनाक्रम
  • 2 जनवरी, 1975 : समस्तीपुर जंक्शन पर रेलवे के समारोह में रेलमंत्री ललित नारायण मिश्रा पर ग्रेनेड से हमला
  • समस्तीपुर पुलिस ने अज्ञात लोगों पर मुकदमा दर्ज किया
  • 3 जनवरी, 1975 : दानापुररेलवे अस्पताल में मौत
  • 3 जनवरी : सीआईडीजांच शुरू
  • 7 जनवरी : सीबीआईने मामला दर्ज किया।
  • 24 नवंबर :पटना में विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में सभी अभियुक्तों के खिलाफ चार्जशीट। यहां चार साल तक मामला चला।
  • मई, 1977 : मैथ्यू आयोग का गठन। जांच के बिंदु रहे-मौत के कारण के तौर पर चिकित्सा चूक मौके पर सुरक्षा की स्थिति।
  • मामले की सुनवाई में बाधा पहुंचे, फेयर ट्रायल हो, ऐसे तर्कों पर इस मामले को दूसरी जगह ट्रांसफर करने की बात सीबीआई ने उठाई।
  • 1978: केंद्रमें जनता पार्टी और बिहार में कर्पूरी ठाकुर की सरकार ने सीबीआई की विश्वसनीयता निष्पक्षता पर सवाल उठाया।
  • 17 दिसंबर, 1979 : सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई दिल्ली की अदालत में कराने का निर्देश दिया। दिल्ली पहुंचा मामला।
  • ख्याति प्राप्त न्यायविद वीएम तारकुंडे की इस पर आपत्ति कि सीबीआई इस मामले में निदोर्षों को फंसा रही है।
  • जनवरी,1981 : अभियुक्तों के खिलाफ आरोप तय करने को मामले को ट्रायल के लिए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के पास भेजा गया।
  • 17 अगस्त, 2012 : सुप्रीमकोर्ट ने कहा-इस आधार पर निरस्त नहीं होगा यह मामला कि सुनवाई में 37 वर्ष गुजर गए।
  • 12 सितंबर, 2014 : कड़कड़डूमा, नई दिल्ली की अदालत के जिला न्यायाधीश विनोद गोयल ने मुकदमे की सुनवाई पूरी की। 12 नवंबर को फैसला सुनाने की बात कही।
  • 12 नवंबर : बोले विजय गोयल- आठ दिसंबर को आएगा फैसला।
  • 8 दिसंबर : चार आरोपी दोषी करार दिए गए।
  • 15 दिसंबर : सजा सुनाने की तारीख आगे बढ़ी।
  • 18 दिसंबर: दोषियों को सुनाई जाएगी सजा।