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अशोक धाम: बगैर किसी लग्न-मुहूर्त के यहां होते हैं मांगलिक कार्य

श्री इंद्रदमनेश्वर महादेव मंदिर में प्राचीनकाल से पूरी होती हैं मनोकामनाएं, खुदाई के दौरान मिला था शिवलिंग।

Dainik Bhaskar

Jul 19, 2014, 09:42 AM IST
Bihar news Ashok Dham Here auspicious hour work without any ascendant
फोटो: श्री इंद्रदमनेश्वर महादेव मंदिर अशोक धाम।
लखीसराय/पटना. श्री इंद्रदमनेश्वर महादेव मंदिर अशोक धाम ऐसा धाम है, जहां शादी-विवाह से लेकर मुंडन संस्कार तक बगैर किसी लग्न-मुहूर्त के कभी भी संपन्न होता है। सावन माह में प्रतिदिन भक्तगण सिमरिया के गंगाघाट से कांवर लेकर जल भरकर पैदल 30 किमी अशोक घाम श्री इन्द्रदमनेश्वर महादेव मंदिर में पूजा अर्चना करने पहुंच रहे हैं। प्रत्येक सोमवारी को 42 से 50 हजार भक्त जलाभिषेक करने पहुंचते हैं।
बिहार और झारखंड में मनाए जा रहे श्रावणी मेले के अवसर पर दैनिक भास्कर डॉट कॉम बता रहा लखीसराय जिले के श्री इंद्रदमनेश्वर महादेव मंदिर अशोक धाम की कुछ खास बातें।
श्री इन्द्रदमनेश्वर महादेव मंदिर ट्रस्ट के द्वारा प्रतिवर्ष 50 जोड़ों का विवाह करवाता है। यहां प्रेम-विवाह और पकड़ौवा-विवाह बिना रोक-टोक के सम्पन्न होता है। मान्यता है, कि भगवान भोलेनाथ की इच्छा जब प्रकट होकर अपने भक्तों में भक्ति भावना को जगाते हुए उनकी मनोकामना पूरी करने की हुई तो उन्होंने अशोक नामक चरवाहे को प्रेरणा दी। अशोक ने गिल्ली डंडा खेलने के दौरान रजौना के ग्रामीणों के साथ मिलकर टीले की खुदाई कर डाली। खुदाई में काले रंग का शिवलिंग मिला। उसी के बाद नए सिरे से मंदिर बनाकर शिवलिंग की स्थापना की गई।
आगे पढ़िए पालवंश के शासक ने बनवाया था...
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फोटो: भगवान शिव का जलाभिषेक करते श्रद्धालु।
 
पालवंश के शासक ने बनवाया था 

अशोकधाम गुप्तकाल में भी अत्यंत महत्वपूर्ण धर्मस्थल था। मान्यता है, कि शिवलिंग का नामकरण श्री इन्द्रदमनेश्वर महादेव ने किया था। यह नाम पालवंश का शासक धर्मपाल सन 770 से 810ई. तक बौद्धमतावलम्बी था। उन्होंने विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना की थी। उनके काल में बौद्धधर्म का विकास हुआ। 1977 में इसकी खुदाई की गई।
 
आगे पढ़िए 1000 शिव मन्दिर बनवाए...
 
 
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फोटो: मंदिर में नतमस्तक होते श्रद्धालु।
 
1000 शिव मन्दिर बनवाए
 
इसके साथ ही मंदिरों के विध्वंस की गति भी तीव्र हुई। इसी वंश में नारायण पाल शासक हुआ करते थे। उन्होंने अपनी राजधानी मुद्रागिरि (मुंगेर) में रखी। भागलपुर संग्रहालय के ताम्रपत्र से ज्ञात होता है, कि उसने मुद्रागिरि से श्रीनगर पाटलिपुत्रा के बीच 1000 शिव मन्दिर बनवाए। इस शिवलिंग को भी उसी श्रृंखला की कड़ी में माना जाता है। यह कालांतर में जमीन के नीचे चला गया। फिर 1977 में इसकी खुदाई की गई। यह स्थान स्टेशन से 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। राजधानी पटना से 125 किलोमीटर पूरब है। 

आगे देखिए मंदिर से संबंधित तस्वीर...

 
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फोटो: भगवान शिव की पूजा करते श्रद्धालु।
 
 
 
आगे पढ़िए देवघर में पौने चार लाख भक्तों ने किया जलाभिषेक... 
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फाइल फोटो: देवघर स्थित बाबा वैद्यनाथ धाम।
 

देवघर में पौने चार लाख भक्तों ने किया जलाभिषेक 

सुलतानगंजसे लेकर देवघर तक 105 किलोमीटर का कांवरिया पथ केसरिया रंगों से भरा पड़ा है। एक कांवरिया साइकिल को पूरे रथ की तरह सजाकर जल लेकर पहली बार देवघर पहुंचे। जबकि कई कांवरिया अनोखे साज-सज्जा के साथ बाबा को जलार्पण करने पहुंचे थे। शुक्रवार को श्रावणी मेले का छठा दिन है और अब तक 3 लाख 75 हजार 680 कांवरियों ने बाबा पर जलार्पण किया। हालांकि, शुक्रवार को भी कांवरियों की भीड़ काफी रही। 
 

 
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