फोटो: गर्म पानी के कुंड में नहाने के लिए लगती है लोगों की लाइन।
पटना. हरे-भरे घने जंगलों, प्राकृतिक दृश्यों और पांच पहाड़ियों के बीच बसे राजगीर को भारत के सबसे पवित्र स्थलों में से एक माना जाता है। राजगीर न सिर्फ एक प्रसिद्ध धार्मिक तीर्थस्थल है, बल्कि एक
खूबसूरत हेल्थ रेसॉर्ट के रूप में भी लोकप्रिय है। देव नगरी राजगीर सभी धर्मो की संगमस्थली है। यहां प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ विविध संस्कृति का संगम देशी-विदेशी पर्यटकों को हमेशा आकर्षित करती रही है। यहां सबसे ज्यादा चर्चा होती है गर्म जल कुंड की। इस कुंड से सालों भर गर्म पानी निकलता रहता है। यहां आने वाले लोग इस गर्म जल कुंड में स्नान करना नहीं भूलते। वैसे तो सर्दियों के मौसम में जल कुंड में स्नान करने वालों की भीड़ ज्यादा होती है, पर गर्मी में भी लोगों की कतार देखी जा सकती है।
22 कुंड और 52 जलधारा
प्राचीन मान्यताओं और पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान ब्रह्मा के मानस पुत्र राजा बसु ने राजगीर के ब्रह्मकुंड परिसर में एक यज्ञ का आयोजन कराया था। इसी दौरान आये सभी देवी-देवताओं को एक ही कुंड में स्नान करने में परेशानी होने लगी तभी ब्रह्मा ने यहां 22 कुंड और 52 जलधाराओं का निर्माण कराया था। सबसे गर्म कुंड को ब्रह्मकुंड कहा जाता है, जिसका तापमान 45 डिग्री सेल्सियस होता है। मलमास मेले के दौरान यहां लाखों साधु-संत पधारते हैं। यहां डुबकी लगा कर भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। वैभारगिरी पर्वत की सीढ़ियों पर मंदिरों के बीच गर्म जल के कई झरने हैं, जहां सप्तकर्णी गुफाओं से जल आता है। ऐसी संभावना जताई जाती है कि इसी पर्वत पर स्थित भेलवाडोव तालाब है, जिससे ही जल पर्वत से होते हुए यहां पहुंचता है। इस पर्वत में कई तरह के केमिकल्स जैसे सोडियम, गंधक, सल्फर हैं। इसकी वजह से जल गर्म और रोग को मिटाने वाला होता है।
22 कुंडों में कर सकते हैं स्नान
यहां पर आप 22 कुंडों में स्नान कर सकते हैं। इन कुंडों के नाम अलग-अलग हैं। ब्रह्मकुंड सबसे महत्वपूर्ण हैं। इसका तापमान 45 डिग्री सेल्सियस होता है। इसे पाताल गंगा भी कहा जाता है। सभी झरनों में स्नान करने के बाद इस कुंड में भी लोग स्नान करते हैं। जो सप्तधाराएं बहती हैं, उसके नाम भी ऋषि-मुनियों के नाम पर रखे गए हैं। 22 कुंडों में ब्रह्मकुंड के अलावा मार्कंडेय कुंड, व्यास कुंड, अनंत ऋषि कुंड, गंगा-यमुना कुंड, साक्षी धारा कुंड, सूर्य कुंड, गौरी कुंड, चंद्रमा कुंड, राम-लक्ष्मण कुंड। राम-लक्ष्मण कुंड में एक धारा से ठंडा और दूसरे से गर्म पानी निकलता है। छठ के समय में सूर्य कुंड का महत्व बढ़ जाता है। श्री राजगीर तपोवन तीर्थ रक्षा पंडा समिति के संयुक्त सचिव डॉ वीरेन्द्र उपाध्याय बताते हैं कि इस पर वैज्ञानिक जेपी बोस ने भी शोध किया था। उन्होंने बताया था कि पानी में किस केमिकल्स की कितनी मात्रा है। लोगों का मानना है कि इस कुंड में स्नान करने से चर्म रोग ठीक हो जाते हैं।
अन्य धर्म के भी कुंड
लोगों का कहना है कि अपने लंबे सफर के दौरान गुरु नानक देव जी भी राजगीर आए थे और यहां झरने में स्नान किया था। उनकी याद में ब्रह्म कुंड के पास एक गुरुघर ( गुरुद्वारा) भी बना है। देश भर से सिख श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। यहां मुस्लिमों के लिए मखदुम कुंड भी है।
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