पटना. पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मंगलवार की शाम अपने समर्थक विधायकों के साथ दिल्ली के लिए रवाना हुए। राजद और कांग्रेस के भी विधायक उनके साथ थे। नीतीश कुमार दिल्ली में राष्ट्रपति से मुलाकात करेंगे और उनके समक्ष अपने समर्थक विधायकों की परेड करवा सकते हैं। इधर, मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने शाम को कैबिनेट की बैठक बुलाई। जहां उन्होंने 22 प्रस्तावों को मंजूरी दी।
विस अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव खारिज
विधानसभाध्यक्ष उदय नारायण चौधरी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश होने के पहले खारिज हो गया। विधानसभा के सचिव ने उसे स्वीकार करने से ही इंकार कर दिया। निर्दलीय विधायक पवन जायसवाल ने विधानसभाध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था। दिन में साढ़े तीन बजे जायसवाल विधानसभा पहुंचे और सचिव को प्रस्ताव की प्रति दी। सचिव ने उन्हें यह कहकर लेने से इंकार कर दिया कि वो नियमसमम्त नहीं है। सचिव के कमरे में इसके लिए एक घंटे से अधिक समय तक बहस होती रही। इस अवसर पर ज्ञानेन्द्र सिंह ज्ञानू, राहुल शर्मा, रवीन्द्र राय भी मौजूद थे।
कल मिले थे राज्यपाल से
इससे पहले सोमवार को राज्यपाल ने नीतीश और मांझी दोनों कैंप की सुनी, लेकिन कोई फैसला नहीं सुनाया। वे शाम सात बजे राज्यपालों के सम्मेलन में भाग लेने के लिए दिल्ली रवाना हो गए। नीतीश, शरद, लालू प्रसाद और कांग्रेस नेता सदानंद सिंह के साथ राज्यपाल से मिले थे। कहा-130 विधायक परिचय पत्र के साथ आए हैं, जिनकी हम परेड करा सकते हैं। पर राज्यपाल ने कहा-अभी जरूरत नहीं है। बाद में नीतीश बोले-अगर वे 24-48 घंटे में संविधान सम्मत कार्रवाई नहीं करते हैं तो विधायक राष्ट्रपति के समक्ष परेड करेंगे। राजद, कांग्रेस व भाकपा के भी विधायकों ने राजभवन मार्च किया।
नीतीश के निकलते ही मुख्यमंत्री मांझी राज्यपाल से मिलने पहुंचे। बहुमत होने का दावा किया। उन्होंने 19, 20 या 23 फरवरी को बहुमत साबित करने का मौका देने का अनुरोध किया। सदन में गुप्त मतदान की आवश्यकता जताई। वोटों की गिनती के समय दोनों पक्ष से एक-एक पर्यवेक्षक रखने मांग भी की। राज्यपाल से मिलने के बाद उन्होंने बताया कि नीतीश के पास बाहुबलियों की कमी नहीं है। इसी वजह से मेरे साथ के बहुत से विधायक अभी सामने नहीं आना चाहते। अब यह राज्यपाल के ऊपर है कि वे मुझे कब मौका देना चाहते हैं। नीतीश का विधानमंडल दल के नेता के रूप में चयन अवैध है। मैंने राज्यपाल को बताया है कि मैं बहुमत साबित करने से भाग नहीं रहा हूं। जब मौका मिलेगा बहुमत साबित कर दूंगा।
आगे क्या
राज्यपाल तीन दिन दिल्ली में रहेंगे। विधि विशेषज्ञों से सलाह लेंगे। वे चाहें तो 20 को अभिभाषण के बाद ही मांझी को सदन में बहुमत साबित करने को कह सकते हैं। नीतीश की मांग के अनुरूप वे 20 के पहले भी सदन की बैठक बुलाने का मांझी को निर्देश दे सकते हैं।
मांझी क्या करेंगे
27 सदस्य जुटाने की कोशिश। भाजपा के 87 और तीन निर्दलीय साथ हैं। स्पीकर को हटाने के लिए संकल्प लाने की तैयारी है। सभा सचिव को संकल्प दिए जाने पर 14वें दिन इसपर विचार होगा। उस दिन 38 सदस्य पक्ष में होना जरूरी है। बहुमत का जुगाड़ होने पर स्पीकर हटाए जा सकते हैं। पर इसके पहले उन्हें खुद का बहुमत दिखाना होगा।
नीतीश खेमा
130 विधायकों की एकजुटता बरकरार रखने की कोशिश। राष्ट्रपति के समक्ष इनकी परेड करा सकते हैं।
राजद में टूट संभव
8-9 विधायक बगावत कर सकते हैं। राघवेन्द्र सिंह ने कहा- हमने विधायक दल की बैठक में मांझी को हटाने पर सवाल उठाया है। सदस्यता गंवा कर भी हम सदन में मांझी का साथ देंगे।
भाजपा
मांझी यदि बहुमत साबित करने के लिए जरूरी 27 विधायक जुटा लेंगे तो ही भाजपा साथ देगी। नीतीश को अवसर मिलेगा तो विरोध करेंगे। केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी बोले-राज्यपाल के निर्णय के बाद पत्ते खोलेंगे।
स्पीकर ने मांझी को असंबद्ध किया
स्पीकर उदय नारायण चौधरी ने सोमवार को मांझी को जदयू से निष्कासित किए जाने के बाद असंबद्ध सदस्य घोषित कर दिया। अब सदन में सीएम के बैठने का स्थान तो नहीं बदलेगा, लेकिन जदयू सदस्य सत्ता पक्ष में कैसे बैठेंगे यह देखना रोचक होगा। मांझी इंदिरा गांधी का इतिहास दुहराएंगे। 1969 में पार्टी से निष्कासन के बाद इंदिरा पीएम बनीं रही थीं।
आगे की स्लाइड्स में देखिए सोमवार को पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के समर्थन में राजभवन के लिए मार्च करते जदयू विधायकों की फोटोज...