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यहां कोर्ट का निर्देश, वहां बढ़ी नीतीश की चिंता

6 वर्ष पहले
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नई दिल्ली/पटना. बिहार भवन में बुधवार को सचमुच सत्ता संघर्ष का पूरा सीन था। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सुबह से ही व्यस्त थे। व्यस्तता ऐसी कि दो बजे दिन में उन्हें आराम की तलब हो गई। ड्राइंग रूम में बैठे पत्रकारों से उन्होंने घंटे भर की नींद के लिए मोहलत मांगी। कुछ देर आराम के बाद वे राष्ट्रपति भवन जाने की तैयारी में जुट गए।
कुमार ने सबसे अधिक समय पत्रकारों को दिया। प्राय: सभी चैनलों की ख्वाहिश थी कि वे अलग से उनसे बातचीत करें। वे इसके लिए राजी हो गए। लेकिन, बिहार भवन के सभा कक्ष में धक्का-मुक्की का माहौल बन गया। मशक्कत के बाद पत्रकारों के साथ बातचीत का सिलसिला शुरू हो पाया। करीब दो घंटे तक वे पत्रकारों के सवालों से जूझते रहे। वे बता रहे थे कि सपा प्रमुख मुलायम सिंह के आग्रह पर ही बिहार के विधायकों को ग्रेटर नोएडा के एक होटलों में रखा गया। नई दिल्ली में 130 विधायकों को ठहराने में दिक्कत हो रही थी। यहां विधायकों का पूरा ख्याल रखा जा रहा है। यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव खुद व्यवस्था देख रहे हैं।
नीतीश सहज ढंग से बातचीत कर रहे थे। उसी समय खबर आई कि पटना हाईकोर्ट ने उनके विधायक दल का नेता चुने जाने पर रोक लगाने का आदेश दिया है। सांसद आरसीपी सिंह को कहा गया कि वे पूर्व मंत्री पीके शाही से बातचीत करें। सिंह मोबाइल लेकर कमरे में चले गए। शाही लाइन पर थे। नीतीश भी उनसे बातचीत के लिए कमरे में चले गए। कमरे में प्रवेश करते वक्त उनके चेहरे पर चिंता की लकीरें थीं। लेकिन, निकले तो चेहरे का भाव सामान्य था। बोले- शाहीजी से बात हो गई। चिंता की कोई बात नहीं है। कोर्ट ने किसी फैसले पर रोक नहीं लगाया है। राज्यपाल के अधिकार क्षेत्र की बात कही गई है। पत्रकारों ने आग्रह किया कि कोर्ट वाले मामले पर आप एक बाइट दे दीजिए। नीतीश राजी नहीं हुए। वशिष्ठ नारायण सिंह की ओर इशारा कर बोले- दादा ही बोलेंगे। वैसे, पटना में शाहीजी मीडिया से बात कर रहे हैं।
पान खाने निकले विधायक तो
राष्ट्रपति के सामने अपना समर्थन दिखाने दिल्ली गए कुछ विधायक बुधवार की रात पान खाने निकले। उनको होटल में नहीं देख धीरे-धीरे चर्चा हुई, फिर अचानक अजीब सी स्थिति। होटल में बैठे कई विधायक इनको ताबड़तोड़ फोन करने लगे। खैर, सभी होटल में लौटे।