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औरंगाबाद में नक्सली बंद का असर, छाया कई बाजारों में सन्नाटा

7 वर्ष पहले
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औरंगाबाद/पटना. आज नक्सलियों के मगध बंद की घोषणा का प्रभाव पूरे जिले में देखा जा रहा है। नवीनगर में सारे बाजार बंद हैं और परिचालन तक ठप हो गया है। टंडवा और देव में बंद का व्यापक असर देखा जा रहा है और यहां कई गवर्नमेंट ऑफिसेज तक बंद हैं। कई बैंक भी आज बंद है। सोमवार होने से बैंक के कार्य पर बेहद असर पड़ा है। वहीं लोगों को भी काफी परेशानी हो रही है। साथ ही बालूगंज, गोह में भी इस बंद का साफ असर देखा जा रहा है। हालांकि जिला मुख्यालय में इसका बिल्कुल भी प्रभाव नहीं है और दूकानें खुली हुई हैं।
बताते चलें कि नक्सलियों ने 27 जनवरी को पुलिस कार्रवाई के खिलाफ में बंद का आह्वाहन किया था। नक्सलियों का कहना था कि कुछ दिनों से पुलिस नक्सली मुठभेड़ का नाम देकर ग्रामीणों और बच्चों को पर जुल्म कर रही है। ग्रामीणों को उन्हें बुरी तरह से पीटा गया था। इसी के विरोध में आज बंद की घोषण की गई थी।
23 जनवरी को भी नक्सलियों ने 24 घंटे बंद की घोषणा की थी । इसे लेकर जमुई के सिमुरतला बाजार, नरंगजौ बाजार, झाझा 1 नम्बर सर्किल, चकाई और खैरा सहित कई बाजार बंद थे। वहीं बांका जिले में भी बंद का असर देखा गया था। तकरीबन सभी बाजार बंद थे और बड़े वाहनों की आवाजाही भी ठप हो गई थी।
बताते चलें कि 5 जनवरी 2014 को सिकंदरा थाना क्षेत्र के पाठकचक के जंगल में पुलिस के साथ हुई नक्सली मुठभेड़ को फर्जी बता नक्सलियों ने 24 घंटे की बंदी का आह्वान किया था। नक्सली के पूर्वी बिहार, उत्तरी झारखंड के जोनल कमिटी प्रवक्ता लालजीत कोड़ा ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा था कि 5 जनवरी को पुलिस ने जोसेफ हासदा नामक सदस्य की हत्या कर दी थी।
पुलिस के साथ उस दिन कोई मुठभेड़ नहीं हुआ था। जोसेफ हासदा पानी लेने के लिए नीचे उतरा था और पुलिस के हत्थे चढ़ गया। पुलिस ने उसे पकड़ लेने के बाद उसकी हत्या कर दी और उसे पुलिस के द्वारा हुए मुठभेड़ में मारे जाने की बात बताई थी।