फोटो: इस मंदिर में मां दुर्गा के कात्यायिनी स्वरूप की पूजा-अर्चना होती है।
खगड़िया/पटना. अब तक आपने यही सुना हुआ होगा कि भगवान शिव के मंदिरों में गांजा, भांग, धतूरा और दूध चढ़ाए जाते हैं पर बिहार में मां दुर्गा का एक ऐसा मंदिर है जहां चढ़ावे के रूप में गांजा का प्रयोग होता है। भक्तजन देवी मां को प्रसन्न करने के लिए गांजा और दूध चढ़ाते हैं। यह मंदिर है खगड़िया जिले के धमारा स्टेशन के पास। मानसी-सहरसा रेलखंड पर स्थित इस स्टेशन पर बने इस मंदिर में मां दुर्गा के कात्यायिनी स्वरूप की पूजा-अर्चना होती है।
कोसी क्षेत्र का प्रमुख शक्तिपीठ
यह मंदिर कोसी क्षेत्र का प्रमुख शक्तिपीठ है। ऐसी मान्यता है कि इस जगह पर मां सती की बाईं भुजा गिरी थी। इसके बाद इसे शक्तिपीठ के रूप में देखा जाने लगा। कहा जाता है कि मां पार्वती के पिता राजा दक्ष ने यज्ञ का आयोजन किया था। उन्होंने भगवान शिव को इसमें आने का न्योता नहीं दिया। भगवान शिव इससे गुस्से में आ गए और उन्होंने पार्वती को भी इसमें जाने से मना कर दिया पर मां पार्वती नहीं मानी और वह चली गईं। पार्वती तो वहां चली गईं पर उन्हें वहां काफी कुछ सहना पड़ा। वहां मौजूद लोगों ने उन पर कटाक्ष किया, जिससे वे काफी आहत हुईं। इससे दुखी होकर वे हवनकुंड में कूद गईं। भगवान शंकर इससे काफी गुस्से में आ गए और तांडव करने लगे। स्थानीय लोग बताते हैं कि यहां श्रीपत महाराज नाम का एक पशुपालक मां की रोज पूजा अर्चना किया करता था। इसी कारण पशु का पहला दूध देवी को चढ़ाने की परंपरा है। उनका विश्वास है कि ऐसा करने से दुधारू पशुओं पर कभी कोई आंच नहीं आती है।
षष्ठी को होती है विशेष पूजा
कात्यायिनी का रूप होने के कारण यहां दशहरा के समय षष्ठी को विशेष पूजा होती है। यहां लोग दूर-दराज के इलाके से विशेष पूजा में भाग लेने आते हैं। साल भर आगमन के अलावा यहां सोमवार और शुक्रवार को लोगों की भीड़ के कारण मेले जैसा दृश्य होता है। इस जगह को पर्यटक स्थल के रूप में विकास करने की बात कई बार चली पर जनप्रतिनिधियों ने इस ओर कभी ध्यान नहीं दिया और आज भी यह पूरी तरह उपेक्षित है।
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