पटना. धूप अगरबत्ती की खुशबू राजधानी की सड़कों पर फैलने लगी है। आज माता के दूसरे रूप ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की गई। इसे लेकर सुबह से ही पूजा पंडालों और माता के मंदिर में भक्तों की भीड़ जुटी रही। पूजा के लिए मंदिरों में भी खास प्रबंधन किए गए हैं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो।
मां दुर्गा केनौ स्वरूपों में से दूसरा स्वरूप ब्रह्मचारिणी का है। नवरात्र के दूसरे दिन मां के इसी रूप की पूजा की जाती है। माता तपस्या का आचरण करने वाली हैं। इसी कारण इन्हें ब्रह्मचारिणी कहा जाता है। मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप बहुत ही सात्विक और भव्य है। वे श्वेत वस्त्र में लिपटी हुई कन्या रूप में हैं। इनके दाएं हाथ में जप की माला और बाएं हाथ में कमंडल रहता है। इस दिन साधक अपने मन को मां ब्रह्मचारिणी के चरणों में लगाते हैं और कुण्डलिनी शक्ति को जागृत करने के लिए साधना करते हैं। यह रूप भक्तों और साधकों को अनंत कोटि फल देने वाला है। इनकी उपासना करने से उपासक के मन में सदाचार, तप, वैराग्य और संयम की भावना जागृत होती है।
नवरात्र चंद्र नक्षत्र में हो रहा शुरू
इस बार नवरात्र चंद्र नक्षत्र में शुरू हो रहा है और यह नक्षत्र बहुत फलदायी माना जाता है। वहीं आर्यकुमार रोड में एबीसी क्लब की ओर से आयोजित पूजा को लेकर नौ कलश स्थापित किया गया है। एबीसी क्लब की ओर से इस बार माता के 15 रूपों की अलग-अलग 35 मूर्तियां स्थापित की जाएंगी। सबसे खास यह है कि इसमें मां गौरी को मां लक्ष्मी से युद्ध करते हुए दिखाया गया है।