फाइल फोटो: बाढ़ स्टेशन पर शुक्रवार सुबह दो ट्रेनों की टक्कर हो गई थी।
मोकामा/पटना. बाढ़ स्टेशन पर नॉर्थ ईस्ट एक्सप्रेस और किउल-पटना डीएमयू सवारी गाड़ी के बीच हुई टक्कर को साइड कोलेजन की घटना मानी जा रही है। बाढ़ स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर दो पर खड़ी किउल पटना डीएमयू सिग्नल लाल हो जाने पर भी नहीं रुकी। डीएमयू के बिना सिग्नल के चल पड़ने और सामने से डाउन लाइन पर रही नॉर्थ ईस्ट के ट्रैक पर डीएमयू के चले जाने के कारण टक्कर हो गई। प्रारंभिक जांच में डीएमयू के चालक की लापरवाही सामने आई है। डीएमयू को पहले हरा सिग्नल दिया गया था, लेकिन फिर सिग्नल को लाल कर दिया गया। पर ट्रेन नहीं रुकी।
एसी कोच से पहले वाली स्लीपर कोच से जा टकराई
किउल पटना डीएमयू शुक्रवार को मोकामा से सुबह 4.44 बजे पटना के लिए रवाना हुई थी। 5.24 बजे बाढ़ स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर दो पर पहुंची थी। उसे रोककर अन्य ट्रेनों को निकाला गया। सुबह 6.43 बजे बाढ़ स्टेशन के डाउन मेनलाइन से आनंद विहार गुवाहाटी एक्सप्रेस को निकलना था। घने कोहरे के कारण बाढ़ स्टेशन पर उसे आगे की दूरी के लिए मेमो लेना था। नॉर्थ ईस्ट एक्सप्रेस बाढ़ स्टेशन के प्लेटफॉर्म को छू रही थी और लगभग आधी ट्रेन बाढ़ पश्चिमी समपार फाटक से निकल चुकी थी। इसी दौरान कॉमन लूप लाइन यानी प्लेटफॉर्म दो पर खड़ी ट्रेन सिग्नल लाल होने पर भी चल पड़ी। सूत्रों की मानें तो डीएमयू को पहले सिग्नल दिया गया था, लेकिन फिर सिग्नल लाल कर दिया गया। सिग्नल लाल रहने के बावजूद डीएमयू के अचानक चल पड़ने से यह ट्रेन नॉर्थ ईस्ट एक्सप्रेस के एसी कोच से पहले वाली स्लीपर कोच से जा टकराई। रेलवे की शब्दावली में इस घटना को साइड कोलिजन कहा जाता है।
गायब हो गया था ड्राइवर
हादसे के बाद भोजपुर डीएमयू का चालक और सहायक चालक फरार हो गए। जब अधिकारी बाढ़ स्टेशन पहुंचे, तो ड्राइवर का कोई अता पता नहीं था। हालांकि ड्राइवर 12 बजे अधिकारियों के सामने आया। रेलवे की प्रारंभिक जांच में भी ड्राइवर की लापरवाही सामने आई है।
नॉर्थ ईस्ट के चालक ने दिखाई तेजी
नॉर्थईस्ट एक्सप्रेस की धीमी रफ्तार ने कई यात्रियों की जान बचा ली। हादसे के वक्त नॉर्थ ईस्ट एक्सप्रेस की रफ्तार काफी धीमी थी और उसी वक्त डीएमयू जा टकराई। नॉर्थ ईस्ट के चालक ने जैसे ही डीएमयू को ट्रेन से टकराते देखा उसने तुरंत ब्रेक लगा दिया। रेल कर्मियों ने बताया कि यदि नॉर्थ ईस्ट एक्सप्रेस पूरी रफ्तार में होती, तो डीएमयू से टक्कर के बाद उस ट्रेन को जोर का झटका लगता और फिर बड़ी घटना हो सकती थी।
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