गया/पटना. दिल्ली में मल्टीनेशनल कंपनी में काम करनी वाली महिला के साथ कैब में रेप के मामले ने महिला सुरक्षा को लेकर फिर से कई सवालों को जन्म दिया है। क्या देश के दूसरे शहरों की टैक्सी सेवा महिलाओं के लिए सुरक्षित हैं? अगर हां; तो कैसे? यदि खामियां हैं, तो उन्हें दूर करने क्या कोशिश हो रही है? आगे पढ़िए गया और पटना में क्या है कैब की स्थिति।
पर्यटन की दृष्टि से बोधगया का अंतर्राष्ट्रीय महत्व है। सरकार भी इसे बढ़ावा देने की हर कोशिश कर रही है, परंतु यहां परिचालित ऑटो रिक्शा, ई-रिक्शा कैब के अधिकतर चालकों के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस यानी कॉमर्शियल लाइसेंस नहीं है। पिछले पांच वर्षों से गया में कॉमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस नहीं बन रहा है।
बोधगया में पर्यटन सीजन शुरू हो चुका है। देश-विदेश से बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंच रहे हैं। जनवरी माह में अंतरराष्ट्रीय बौद्ध महोत्सव भी होना है, पर सुरक्षा की दृष्टि से भाड़े के यात्री वाहनों पर लगाम की कोशिशें नहीं हो पा रही हैं। कैब अथवा ऑटो पर मालिक, चालक का नाम और
मोबाइल नंबर अंकित नहीं रहता। यहां तक कि कई नाबालिग भी अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल बोधगया में कैब, ऑटो और ई-रिक्शा चला रहे हैं।
यहां है प्रशिक्षण की सुविधा
पटना, मुजफ्फरपुर (दो), नालंदा, बेगूसराय, हाजीपुर, कटिहार, मोतिहारी (दो), सीवान, हिसुआ-नवादा और बक्सर।
वर्षवार निबंधित वाहन
वर्ष कॉमर्शियल निजी कुल
2011-12 4227 19770 23997
2012-13 6318 18172 24490
2013-14 6568 20324 26892
2014-नवम्बर तक 3573 16308 19881
वर्षवार निर्गत प्राइवेट डीएल
2011-12 11488
2012-13 13864
2013-14 16590
2014-नवंबर तक 08681
मिलेगा अलग नंबर
विभिन्न मार्गों से बोधगया में परिचालित होने वाले 250 ऑटो और 72 ई-रिक्शा चिह्नित किए गए हैं। इन्हें निबंधन के अलावा अलग से सीरियल नंबर आवंटित किए जा रहे हैं। ऑटो पर यह अंकित होगा। 20 दिसंबर तक यह काम पूरा कर लिया जायेगा।
सुरेंद्र झा, डीटीओ
पर्यटकों की सुविधा और सुरक्षा के मद्देनजर बोधगया में ऑटोटो एवं ई-रिक्शा चालकों के लिए ड्रेस कोड लागू कर दिया गया है। ऑटो के ऊपर मालिक, चालक का नाम और मोबाइल नंबर अंकित करने के निर्देश दिये गए हैं। एक सेट ड्रेस बीटीएमसी के द्वारा दी जाएगी जबकि उसी अनुरूप चालक अपनी ड्रेस आगे बनाएंगे। पर्यटकों से अच्छे व्यवहार के लिए इन्हें प्रशिक्षित भी किया जायेगा। महिला चालकों को प्रशिक्षण की विशेष व्यवस्था की जा रही है।
संजय कुमार अग्रवाल, जिलाधिाकारी, गया
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