फोटो: फादर टेरेसा।
हाजीपुर/पटना. अनाथ बच्चों के साथ यौनाचार के मामले में बुधवार को दोषी करार दिए गए प्रद्युम्न कुमार उर्फ फादर टेरेसा को हाजीपुर कोर्ट में गुरुवार को दस वर्ष की सजा सुनाई गई। एडीजे वन बीके त्रिपाठी की अदालत ने यह सजा मुकर्रर की। अदालत ने आईपीसी की धारा 376 तथा पॉस्कों की धारा 6 के तहत दस-दस साल की सश्रम कारावास के अलावे दस-दस हजार का अर्थदंड भी लगाया। अर्थदंड नहीं देने पर तीन-तीन महीने अतिरिक्त सधारण कारावास की सजा सुनाई गई।
वहीं, आईपीसी की धारा 377 तथा पॉस्को की धारा 8 के तहत प्रद्युम्न को पांच-पांच साल की सश्रम करावास तथा पांच-पांच हजार अर्थदंड की भी सजा सुनाई गई। सभी सजा साथ-साथ चलेगी। वैशाली के चकवाजा गांव में लोकसेवा नाम से अनाथ आश्रम चलाने वाले प्रद्युम्न को आईपीसी की धारा 376 तथा 377 के अलावे पॉस्को की धारा 6 तथा 8 में बुधवार को ही दोषी करार दिया गया था।
बताते चलें कि फादर टेरेसा लोकसेवा नाम से आश्रम चलाता था। प्रद्युम्न आश्रम के बच्चों के साथ अप्राकृतिक यौनाचार करता था। लड़कियों को भी उसने हवस का शिकार बनाया था। इस मामले में एक साल तक सुनवाई चली। कुल पंद्रह गवाह पेश किए गए। प्रद्युम्न के कुकृत्यों का खुलासा पिछले साल 23 अक्टूबर को तब हुआ जब आश्रम के 37 बच्चे एक-एक कर बीमार हो गए। एक बच्चे की मौत भी हो गई थी। डीएम के आदेश पर हुई जांच में आश्रम के ऊपरी तल्ले पर छोटे-छोटे बच्चों को बंद पाया गया था। छापेमारी कर बच्चों को मुक्त कराया गया था। बाद में बच्चों ने डीएम और एसपी को प्रद्युम्न के बारे में चौंकाने वाली जानकारी दी थी।