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पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी करेंगे आज सम्मेलन

7 वर्ष पहले
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पटना. बिहार की राजनीति के लिए शनिवार और रविवार बहुत महत्वपूर्ण दिन साबित होंगे। इन दो दिनों में दो बड़े कार्यक्रम होंगे, जिससे राज्य की राजनीति की दिशा तय होगी। शनिवार को पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल से जदयू के आलाकमान को ललकारेंगे तो रविवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भाजपा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व मुख्यमंत्री मांझी पर निशाना साधेंगे।
आज मांझी के समर्थक बिहार बचाओ कार्यकर्ता सम्मेलन कर रहे हैं, वहीं जदयू ने गांधी मैदान में राज्यस्तरीय राजनीतिक सम्मेलन का आयोजन किया है। वैसे तो दोनों खेमा अपने कार्यक्रमों में कार्यकर्ताओं के साथ बातचीत करने का दावा कर रहा है, लेकिन इसका एकमात्र मकसद विधानसभा चुनाव को लेकर अपनी ताकत का प्रदर्शन करना है।
17 अप्रैल को गांधी मैदान में रैली
पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी शनिवार को नई पार्टी का ऐलान कर सकते हैं। भावी कार्यक्रमों की भी घोषणा होगी। मांझी 11 मार्च को मुजफ्फरपुर से बिहार बचाओ यात्रा करेंगे, जबकि 17 अप्रैल को गांधी मैदान में गरीब स्वाभिमान रैली का आयोजन होगा। मांझी के दिल्ली से आने के बाद शुक्रवार को 1 अणे मार्ग में बैठक हुई। इसमें पूर्व मंत्री वृशिण पटेल, और नीतीश मिश्रा, विधायक ज्ञानेंद्र सिंह ज्ञानू, राजीव रंजन और रविंद्र राय शामिल हुए।
मांझी से तीन सवाल

कुर्सी जाते देख फटाफट निर्णय के रिकॉर्ड बना दिए।
हम राजनीति में हैं। निर्णय जरूरतमंदों के लिए लिया। कोई भी निर्णय रद्द हुआ तो जनता को गोलबंद कर सड़क पर उतर जाएंगे। मुझे मौका मिला था, इसलिए मजबूत इच्छाशक्ति से फैसले लिए। धन की चिंता पहले नहीं की जाती। पहले फैसला, फिर संसाधन जुटाकर उसे लागू किया जाता है।
अब आगे? नया दल बनाएंगे या भाजपा से हाथ मिलाएंगे?
28 फरवरी को गरीब स्वाभिमान सम्मेलन में भावी रणनीति का एलान होगा। अभी नया दल नहीं बनाएंगे। फोरम बनाकर राज्यव्यापी अभियान चलाएंगे। महादलितों को गोलबंद कर विधानसभा में उनकी राजनीतिक ताकत दिखाएंगे। राजनीतिक कार्यकर्ताओं के सम्मान और दलितों के स्वाभिमान को लेकर चुप नहीं बैठने वाला। गांधीजी की कर्मभूमि चंपारण से या नीतीश कुमार के गृह जिला नालंदा से अभियान का श्रीगणेश होगा।
नीतीश कुमार ने समीक्षा के लिए फैसलों की रिपोर्ट मांग रखी है। उन निर्णयों का क्या हश्र होगा?
लगभग 90 फैसले लिए। इनमें अधिसंख्य वैसे हैं, जिसे संबंधित विभागों ने समीक्षा के बाद प्रस्तावित किया। अन्यान्य कोटि के फैसले सैद्धांतिक हैं। विधायकों को चोर बताकर विधायक कोटा समाप्त करना सही था, या उसे चालू करना? कोटे की राशि 3 करोड़ कर दी। 15 लाख तक की योजनाएं बिना निविदा कराने, विधायकों के लिए रेल-विमान यात्रा कूपन दो लाख से तीन लाख करने, पूर्व विधायकों का इस मद में डेढ़ लाख करने का निर्णय रद्द होगा? पूर्वाग्रह के साथ कैबिनेट के फैसले रद्द किए तो सड़क पर आकर विरोध करेंगे।