पटना. राजद-जदयू के विलय की कसरत तेज हो गई है। जनता परिवार के विभिन्न दलों के एका को लेकर दिल्ली में शुक्रवार को विभिन्न पार्टी के वरीय नेताओं की बैठक हो रही है। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इसके लिए दिल्ली पहुंच गए हैं। उधर जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद भी दिल्ली में बैठक में शिरकत करेंगे। सपा अध्यक्ष
मुलायम सिंह यादव भी बैठक में होंगे। बैठक में जदयू, राजद, सपा के अलावा चौटाला, देवेगौड़ा की पार्टियों के विलय की रुपरेखा बनेगी। इसी आधार पर बिहार में राजद-जदयू का विलय होगा।
बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव राजद-जदयू मिलकर लड़ने पर पहले ही सहमत हो चुके हैं। लेकिन इसमें सीटों के बंटवारे पर पंच फंसने की आशंका से दोनों दलों का शीर्ष नेतृत्व विलय की योजना पर काम कर रहा है। उनका मानना है कि इससे सीटों के बंटवारे में कोई समस्या नहीं आएगी और सभी 243 सीटों पर आसानी से उम्मीदवार भी मिल जाएंगे। यदि कांग्रेस या वाम दलों से गठबंधन की बात होती है तो उनके लिए कुछ सीट छोड़ना भी आसान होगा।
सूत्रों की मानें तो जदयू-राजद के मूल कैडर वालों को 100-100 सीटें देने पर प्रारंभिक सहमित भी बनी थी, शेष सीटें कांग्रेस और वाम दलों को देने की योजना है। विलय के बाद ऐसा करना आसान होगा। लालू प्रसाद के चुनाव लड़ने पर रोक के कारण सहमति इस बात पर भी बनाने की कसरत हो रही है कि बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में चुनाव होगा और लालू प्रसाद अभिभावक की भूमिका में होंगे। ऐसा हुआ तो एकीकृत राजद-जदयू के अगले सीएम के उम्मीदवार नीतीश कुमार ही होंगे। पर, पर्दे के पीछे लालू प्रसाद सबसे अहम भूमिका में होंगे।