बोधगया/पटना. बुद्ध की धरती बोधगया में शुक्रवार से शुरू हो रहे तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय बौद्ध समागम के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई है। सुरक्षा से लेकर अन्य चीजों पर सख्ती के साथ नजर रखी जा रही है। इस समागम में 33 देशों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। तेरगर मोनेस्ट्री के पवेलियन को मुख्य समागम स्थल बनाया गया है। इसे पूरी तरीके से सजाया गया है, मानो लग रहा हो किसी अंतरराष्ट्रीय स्थल पर पहुंच गए हैं। इस जगह पर विभिन्न देशों की संस्कृति को प्रदर्शित करने के लिए स्टॉल बनाया गया है। इस समागम में भाग लेने वाले प्रतिनिधि पहुंच चुके हैं। वे सभी विशेष विमान से यहां आये हैं।
शाम में सभी प्रतिनिधि पहले बुद्ध की विशाल प्रतिमा, सुजाता स्तूप का भ्रमण कर महाबोधि मंदिर पहुंचे। प्रतिनिधि सूत्त पाठ भी करेंगे और ध्यान लगाएंगे। रात में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान सबों को बिहार की संस्कृति से अवगत कराया जायेगा। भोजन के दौरान बिहारी व्यंजनों को भी परोसा जायेगा, जिसमें लिट्टी-चोखा प्रमुख होगा। प्रतिनिधयों को बुद्ध से जुड़े बिहार के सभी पर्यटन स्थलों को घुमाया जायेगा। इसके लिए सरकार की ओर से खास व्यवस्था की गई है।
तोहफे में मिलेगी मिथिला पेंटिंग
इस समागम में भाग लेने वाले प्रतिनिधियों को मिथिला पेंटिंग दी जाएगी। उन्हें मिलने वाले बैग पर मिथिला पेंटिंग उकेरी हुई होगी। बैग के साथ बिहार की मधुबनी चित्रकला, काष्ट कला, पत्थर शिल्प व सिकी कला को भी यादगारी के तौर पर अपने देश ले जाएंगे। कुल 400 बैग तैयार किये गए हैं। बैग भी अपने आप में यूनिक है। वह भागलपुरी सिल्क का बना है। बैग में लकड़ी के थिंकिंग बुद्ध बने हैं। सिकी कला में तैयार 12 इंच के बुद्ध हैं। पीपल के पत्ते पर बुद्ध की प्रतिमा है। सिकी कलाकार बांस का एक पेन भी हर डेलीगेट के लिए तैयार किये हैं। इन्हें रखने के लिए भागलपुरी सिल्क का कवर बनाया गया है। इन्हें तैयार करने के लिए उपेन्द्र महारथी शिल्प संस्थान ने सात लोगों को लगाया गया था। पत्थरकटी गया के रवीन्द्रनाथ गौड़ पत्थर के लीफ बुद्धा, मधुबनी के सनी गुप्ता सिकी कला में फोल्डर, दानापुर की माला गुप्ता सिल्क के बैग पर मिथिला पेंटिंग, मानपुर गया के धीरज कुमार वर्मा लकड़ी के बुद्ध, पटना आर्ट कालेज की छात्रा स्मिता भागलपुरी सिल्क में पेन-पेंसिल कवर बनाई है।