पटना. पूर्व उपमुख्यमंत्री
सुशील कुमार मोदी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार गलत व्याख्या कर फिर से महत्वपूर्ण पदों पर सगे-संबंधियों को बैठाने की तैयारी में है। इसके पीछे असली मकसद सरकारी अधिकारियों के प्रभावित करना और आर्थिक दोहन करना है। पार्टी के प्रदेश दफ्तर में मिलन समारोह के बाद पत्रकारों से बात करते हुए मोदी ने कहा कि पिछले दिनों मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने अपने दामाद को अपना निजी सहायक बना लिया था और हंगामा होने पर उसे हटा दिया। इस बीच मंत्रिमंडल सचिवालय ने सगे-संबंधी की व्याख्या ही गलत ढंग से उसकी नई परिभाषा गढ़ दी है। राज्य सरकार के अनुसार सगे-संबंधी का मतलब सिर्फ पति-पत्नी-बच्चे होते हैं।
मोदी ने इस संबंध में उनको लिखे गए विभाग के प्रधान सचिव बी.प्रधान का पत्र जारी किया और कहा कि यह आपत्तिजनक है। भाजपा ऐसी व्याख्या का घोर विरोध करती है। उन्होंने केन्द्रीय एक्ट का उदाहरण देते हुए कहा कि सगं-संबंधी में पति-पत्नी-बच्चे के साथ-साथ भाई-बहन उनके बच्चे, संबंधी, बच्चों के बच्चे उनके संबंधी आदि सभी आते हैं। राज्य सरकार ने इससे अलग जाकर नया ही अर्थ खोज लिया है।
मोदी ने कहा कि परिवहन मंत्री ने अपना बेटी को स्टेट ट्रांसपोर्ट अथारिटी में सदस्य बना दिया है तो मुख्यमंत्री की समधिन को गया रिजनल ट्रांसपोर्ट ऑथरिटी में सदस्य मनोनीत किया गया है। यह सब क्या है? यह बताता है कि सरकार किस दिशा में जा रही है और क्या करना चाह रही है। उन्होंने नीतीश कुमार से इस तमाम मुद्दों पर जवाब मांगा है और कहा है कि क्या वे ऐसा करके भ्रष्टाचार रोकने का दाव कर रहे हैं?