फोटो: यहां पर्यटकों को घूमने के लिए तांगे की सवारी करनी पड़ती है।
पटना. आपने तांगे (टमटम) की सवारी की है? खैर नहीं की तो फिल्मों में जरूर देखा होगा। आज तेजी से शहर में बदल रहे गांवों से यह प्राचीन सवारी लुप्त होती जा रही है। इनकी जगह अब ले ली है मोटर कार ने। पर बिहार में एक ऐसी जगह भी है, जहां आज भी यात्रा करने के लिए टमटम की सहायता लेनी पड़ती है। पर्यावरण के लिहाज से इसे काफी अच्छी सवारी मानी जाती है। बिहार के धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल राजगीर में आज भी घूमने लिए टमटम का ही उपयोग किया जाता है। कुछेक गाड़ियां जरूर चलती है, पर वो भी ना मात्र। इससे भी रोचक बात तो यह है कि यहां तांगे का नाम फिल्मों के हिट किरदारों के नामों पर रखे गए हैं। पर्यटकों का भी मानना है कि तांगे की सवारी से राजगीर घूमने का आनंद दोगुणा हो जाता है। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जब भी राजगीर आते हैं, तांगे की सवारी जरूर करते हैं।
लगभग 500 तांगे चलते हैं यहां
राजगीर में तांगे चलाने की परंपरा काफी पुरानी है। यहां आसपास के लोगों के लिए यह रोजी-रोटी का अच्छा जरिया है। राजगीर में कुल 500 के लगभग तांगे चलते हैं। इसमें से लगभग 450 टमटम रजिस्टर्ड हैं। यहां टमटम चालकों का अपना यूनियन है। सभी तांगा चालकों को यहीं रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता है, जिसका फायदा इन्हें मिलता है। इसके नाम भी अजब-गजब के हैं। शहंशाह, लाल बादशाह, मुकद्दर का सिंकदर, क्रांतिवीर, राजधानी सहित कई चर्चित नाम पर यहां तांगा है।
राजगृह घूमाने के 110 रुपए
राजगीर घूमाने के लिए प्रति व्यक्ति 110 रुपए टमटम चालक लेते हैं। इस पेशे से जुड़े और अब नगर पंचायत के उपाध्यक्ष श्यामदेव राजवंशी बताते हैं कि प्रतिदिन 70-75 टमटम चालकों की टीम यहां रहती है जो पर्यटकों को घूमाने का काम करती है। इस तरह से रजिस्टर्ड हर टमटम चालक को सप्ताह में एक बार पर्यटकों को घमाने का मौका मिलता है। वे कहते हैं कि सितंबर से लेकर फरवरी तक ज्यादा पर्यटक आते हैं। इस समय जिस टमटम चालक की बारी रहती है, वह धर्मशाला और होटलों के पास चले जाते हैं और पर्यटक उसमें बैठकर राजगीर की सैर करते हैं। वे कहते हैं कि मान लीजिए कि एक हजार पर्यटक आये। जिन-जिन जगहों पर ये पर्यटक ठहरे हुए रहते हैं, उस दिन जिनकी बारी होती वे उन जगहों पर चले जाते हैं और फिर चल पड़ती है टमटम की सवारी।
गाइड का भी काम करते हैं टमटम चालक
टमटम चालक एक गाइड के रूप में भी यहां काम करते हैं। उन्हें राजगीर के सारे इतिहास की जानकारी है। बहुत सारे टमटम चालक अंग्रेजी से लेकर जापानी भाषा तक जानते हैं। वे पर्यटकों को सारी जानकारी देते हैं। श्यामदेव राजवंशी कहते हैं कि आजकल थोड़ा पढ़े-लिखे टमटम चालक आ रहे हैं, जिन्हें अंग्रेजी की भी जानकारी है। पर्यटकों के साथ रहते-रहते वे जापानी व चीनी भाषा भी सीख गए हैं। हाल के दिनों में इन टमटम चालकों की सरकार की ओर से मदद की गई है। टमटम की मरम्मत करा कर उसकी रंगाई पुताई करायी गई है। हर टमटम पर पर्यटन विकास निगम का लोगो भी लगा हुआ है। श्यामदेव कहते हैं कि राजगीर में पर्यावरण के लिहाज से टमटम का चलना शुभ है।
आगे की स्लाइड्स में देखिए संबंधित तस्वीरें...