पटना. या देवी सर्वभुतेषु, शक्तिरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नम:... यह मंत्र कल से यानी 25 सितंबर से गली-गली में गूंजेगा। शारदीय नवरात्र 25 से शुरू हो रहा है, उस दिन कलश स्थापना होगी, पर महालया आज बुधवार को है। हालांकि महालया मंगलवार की सुबह 9.11 बजे से चढ़ गया है। बुधवार को 11 बजे दिन तक महालया रहेगा। उसके बाद नवरात्र की प्रतिपदा तिथि की शुरुआत हो जाएगी, लेकिन कलश स्थापना गुरुवार को होगी। महालया को माता के आगमन की पहली सूचना माना जाता है, इसलिए नवरात्र अनुष्ठान करने वालों के लिए महालया का विशेष महत्व है। इधर नवरात्र अनुष्ठान को लेकर पूजा-सामग्री के लिए बाजार में मंगलवार को रौनक रही। खासतौर से पूजन सामग्री की दुकानों में भीड़ दिखी।
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
प्रात:काल से दोपहर 12.19 बजे तक है। इस दौरान प्रतिपदा तिथि हस्त नक्षत्र युक्त ब्रह्म योग है।
कलश स्थापना कल
कलश स्थापना गुरुवार को प्रात: काल से लेकर दोपहर 12.19 बजे तक होगी। क्योंकि इस दौरान प्रतिपदा तिथि हस्त नक्षत्र है। इसके बाद दूज हो जाएगा। पहले दिन कलश स्थापना के साथ प्रथम शैल पुत्री का दर्शन-पूजन प्रतिष्ठा होगी।
क्या है महालया
पितृपक्ष के अंतिम दिन माता दुर्गा के आगमन की सूचना देने की तिथि को महालया कहते हैं। दशहरे के पहले जो अमावस्या तिथि आती है, उसे महालया अमावस्या के नाम से जाना जाता है। एक तरह से इसी दिन से दशहरा की शुरुआत हो जाती है। यह महालया वह पावन अवसर है, जो महिषासुरमर्दिनी, जगत जननी मां दुर्गा के आगमन की सूचना है। जागो तुमि जागो एक प्रकार का आह्वान है, मां दुर्गा को धरती पर बुलाने का। इस मौके पर विशेष प्रकार के बांग्ला भक्तिमय संगीत आगमनी द्वारा मां दुर्गा की स्तुति की जाती है।
ऐसे करें कलश स्थापना
मांभगवती की प्रतिमा के सामने किसी बड़े बर्तन या जमीन पर मिट्टी रखकर उसमें जौ उगने के लिए रखें। कलश पर कच्चा नारियल रखें और स्थापना के बाद मां भगवती की अखंड ज्योति जलाएं। ये पूरे नवरात्र दिन-रात जलती रहनी चाहिए। सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा होती है, फिर वरुण, विष्णु, शिव, सूर्य, चन्द्रादि नवग्रह की पूजा होती है। ऊं नवरात्र पूजनार्थ वरुण देवाय आवह्यामि... मंत्र का उच्चारण करते हुए कलश में पान का पत्ता, सुपारी और कुछ पैसे डाल दें।
जरूरी सामग्री
माता रानी का फोटो, जिसमें माता शेर पर सवार हो दैत्यों का संहार करते हुए अभय मुद्रा में दिखें। इसके अलावा दुर्गा सप्तसती पाठ का किताब, मिट्टी का कलश, ढकना, रोड़ी-सिंदूर, मध रोली, अरवा चावल, अबीर, पंचरत्न, पंचामृत, पंचमेवा, मिश्री, चंदन, सुपारी, पानी वाला एक नारियल, नारियल ढकने के लिए लाल कपड़ा, वेलपत्र, ओढउल अपराजिता का फूल, आम का पल्लो, पान का पत्ता आदि।