पटना. प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय से भी पुराना था तेल्हाड़ा में स्थित विश्वविद्यालय। खुदाई के दौरान जो तथ्य मिले हैं, उसे यह लग रहा है कि इसकी स्थापना कुषाण काल अर्थात प्रथम शताब्दी में हुई थी। खुदाई में विश्विद्यालय भवन के निर्माण में इस्तेमाल की गई ईंट से यह पता चलता है। प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना चौथी-पांचवी शताब्दी में हुई थी। खुदाई के दौरान एक और उपलब्धि मिली है। पहली बार वहां का शिल मिला है, जिस पर विश्वविद्यालय का नाम लिखा है। जो है ‘श्री प्रथमशिवपुर महाविहारीयाये भिक्षु संघ,’।
अब तक इसे तिलाधक अथवा तेल्हाड़ा विश्वविद्यालय के नाम से जाना जा रहा था। शिल पर ब्राह्मणी कुटिल लिपी में लिखा हुआ है, जिसे पढ़ने के लिए
कोलकाता के एक संस्थान में भेजा गया था। तेल्हाड़ा भी नालंदा जिले के एकंगसराय में स्थापित है, जिसकी खुदाई 2009 से चल रही है। कला संस्कृति एवं युवा विभाग से सचिव आनंद किशोर ने कहा कि वे भारत सरकार से आग्रह करेंगे कि तेल्हाड़ा में खुदाई से मिल रहे अवशेषों और वहां के जगह पर शोध होनी चाहिए।
ताकि यह बिहार में एक और अंतर्राष्ट्रीय स्तर की विरासत के बारे में लोगों को और जानकारी मिले। खुदाई में चार शिल मिले हैं, जो टेराकोटा (एक प्रकार की मिट्टी) के बने हैं। इसमें एक चक्र, दो हिरण का चित्र है और नीचे में विवरणी है।