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ढाई महीने बाद भी मंदिर प्रकरण की रिपोर्ट क्यों नहीं: मोदी

7 वर्ष पहले
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फाइल फोटो: पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी।
पटना. पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के मधुबनी के एक मंदिर में पूजा करने के बाद उसे धोने के आरोप की जांच सरकार की ओर से 29 सितम्बर, 2014 को दरभंगा की प्रमंडलीय आयुक्त वंदना किनी और आईजी एके अम्बेडकर को सौंपी गई थी, मगर ढाई महीने बीतने के बावजूद अब तक रिपोर्ट नहीं आई। दूसरी ओर 03 अक्तूबर को गांधी मैदान में हुए हादसे की रिपोर्ट आने में जहां 56 दिन की देरी हुई। वहीं, उसमें न तो किसी दोषी को चिन्हित किया गया और न ही सरकार की ओर से अब तक किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई है। ऐसे में इस जांच रिपोर्ट का क्या मतलब है?
मोदी ने कहा कि मुख्यमंत्री मांझी ने सामाजिक तनाव व सनसनी फैलाने के लिए विगत 28 सितम्बर को बयान दिया कि मधुबनी के अंधराठाढ़ी के जिस मंदिर में उपचुनाव प्रचार के दौरान पूजा किए थे, उसे बाद में धोया गया। उनके इस बयान को तत्काल उनके ही मंत्रिमंडलीय सहयोगी रामलखन राम रमण और नीतीश मिश्रा के साथ ही जदयू के एमएलसी विनोद सिंह ने भी खारिज कर दिया था। मगर, सरकार की ओर से मुख्यमंत्री के आरोपों के बाबत घटना की जांच की जिम्मेवारी प्रमंडलीय आयुक्त और आईजी को दी गई थी। आज तक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। क्या मुख्यमंत्री के आरोप प्रमाणित नहीं हो पाने के कारण जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जा रही है? क्या मुख्यमंत्री ने तनाव और सनसनी फैलाने के इरादे से इस तरह का बयान दिया था? क्या मुख्यमंत्री को आरोप लगा कर मिथिलावासियों को अपमानित करने के लिए सार्वजनिक क्षमा नहीं मांगनी चाहिए?
दूसरी ओर, गांधी मैदान हादसे की जांच रिपोर्ट में भी सरकार पूरे मामले को दबाने और दोषियों को बचाने की कोशिश करती दिख रही है। रिपोर्ट में उक्त हादसे के लिए किसी दोषी पदाधिकारी को चिन्हित तक नहीं किया गया है। राज्य सरकार अविलम्ब दोषियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई करें।