पटना. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी मणिपुर में बिहारी छात्रों पर हमले के तीन दिनों बाद सोमवार को भी हालात में कोई बदलाव नहीं हुआ। छात्रों की पिटाई सोमवार को तो नहीं हुई लेकिन ऐसी परिस्थिति बना दी गई है कि वे न तो हॉस्टल से बाहर निकल सकते हैं और न ही अपने कमरे से। कमरों में भी वे समूह बना कर ही रह रहे हैं।
कभी दरवाजा पीट कर, कभी पत्थर मार कर बिहारी छात्रों को उकसाने की कोशिश की जा रही है लेकिन उनकी सुरक्षा के लिए कॉलेज और स्थानीय प्रशासन ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है। बिहारी छात्र सोमवार को कॉलेज खुला होने के बावजूद अपनी कक्षाओं में नहीं गए क्योंकि हॉस्टल के बाहर स्थानीय छात्र समूह बनाकर उनसे लड़ने को तैयार बैठे थे। द्वितीय वर्ष में पढ़ाई कर रहे एक छात्र ने बताया कि कॉलेज प्रशासन से मैसेज मिला है कि वे बाहर निकलें लेकिन कैंपस में उनकी सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। छात्रों का कहना है कि हर पल उन्हें हंगामे का डर सता रहा है क्योंकि स्थानीय छात्र सीधे उनके विरोध में आ गए हैं।
अब कैंपस में रहने को तैयार नहीं बिहारी छात्र
एनआईटी मणिपुर में बीटेक की कुल 720 सीटें हैं, जिसमें लगभग 150 बिहारी छात्र पढ़ते हैं। आधी सीटें मणिपुर के छात्रों के लिए आरक्षित हैं। अभी कैंपस के हालात ऐसे हो गए हैं कि क्षेत्रीयता की इस लड़ाई में बिहार सहित सभी उत्तर भारतीय छात्र पिस रहे हैं। ये छात्र अब किसी भी तरह कैंपस से बाहर आना चाहते हैं। वे अब एनआईटी मणिपुर में पढ़ाई जारी रखने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि अगर वे कैंपस में बने रहेंगे तो बड़ी दुर्घटना भी हो सकती है क्योंकि तीन दिनों में किसी ने सुरक्षा के लिए कुछ भी नहीं किया है।