पटना. पटना हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ गुरुवार को नीतीश कुमार के समर्थकों ने याचिका दायर की। समर्थकों ने कोर्ट से नीतीश को विधानमंडल दल के नेता चुने जाने पर स्टे वापस लेने का निवेदन किया है। बताते चलें कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के स्थान पर जदयू विधानमंडल दल के नेता के रूप में स्पीकर द्वारा मान्यता प्रदान किए जाने को बुधवार को पटना हाईकोर्ट ने अवैध करार दिया है। कोर्ट ने बुधवार को कहा कि जब तक राज्यपाल निर्णय नहीं करते, स्पीकर के फैसले का कानूनी महत्व नहीं है।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एल नरसिंहा रेड्डी और न्यायमूर्ति विकास जैन की खंडपीठ ने काराकाट के जदयू विधायक राजेश्वर राज की पीआईएल पर यह आदेश दिया। खंडपीठ ने जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह को लिखे विधानसभा के प्रभारी सचिव हरेराम मुखिया के उस पत्र को भी कानून सम्मत नहीं माना, जिसमें उन्होंने नीतीश के नेता चुने जाने की जानकारी दी थी। मुख्य न्यायाधीश ने कहा-स्पीकर ने कुछ ज्यादा ही कर दिया। निर्णय पहले राज्यपाल को लेना है। मामले पर 18 फरवरी को फिर सुनवाई होगी।
एक सप्ताह में मांगा जवाब
राज के वकील शशिभूषण कुमार मंगलम ने कोर्ट को बताया कि मांझी के स्थान पर नीतीश को विधायक दल का नेता चुना जाना असंवैधानिक है। दूसरी ओर, वरीय अधिवक्ता यदुवंश गिरि ने प्रभारी सचिव की ओर से कहा कि यह पीआईएल सुनवाई योग्य नहीं है। यह राजनैतिक मामला है और इसमें कोर्ट को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। इसपर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि हम राजनीतिक विवाद में नहीं पड़ना चाहते। सभी पक्षों को सुनने के बाद ही कोई निर्णय होगा। गिरि ने जवाब देने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। मुख्य सचिव की ओर से प्रधान अपर महाधिवक्ता ललित किशोर उपस्थित थे।