पटना. विधानसभा में विपक्ष के नेता नंदकिशोर यादव ने कहा कि प्रदेश भाजपा में आंतरिक कलह को उजागर करने के लिए जदयू को दवा घोटाले की सीबीआई जांच करानी चाहिए। सोमवार को यादव ने कहा कि सत्तारूढ़ दल के लोगों के अनुसार भाजपा विधानमंडल दल के नेता
सुशील कुमार मोदी अपनी पार्टी के भीतर प्रतिद्वंदी नेताओं को किनारे लगाने के लिए सीबीआई जांच पर जोर दे रहे हैं। इस हालत में तो जदयू को और भी आगे बढ़ कर सीबीआई जांच का समर्थन करना चाहिए। क्या जदयू हमारा इतना शुभचिंतक है जो भाजपा का आंतरिक कलह टालने के लिए वह सीबीआई जांच का विरोध कर रहा है?
यादव ने कहा कि गरीबों-दलितों के नाम पर राजनीति करने वाली जदयू सरकार में करोड़ों रुपये के दवा घोटाले की मार गरीबों पर ही पड़ी है। भाजपा इसकी सीबीआई जांच की मांग कर रही है लेकिन जदयू के नेता, मंत्री और विधायक बिहार की एनडीए सरकार में स्वास्थ्य मंत्रियों पर आरोप लगा रहे हैं। जो लोग शीशे के घर में बैठे हैं, वे ही पत्थर उठा रहे हैं। इस मुद्दे पर मौजूदा स्वास्थ्य मंत्री रामधनी सिंह का यह कहना बेहद शर्मनाक है कि एक-दो करोड़ का घोटाला कोई घोटाला नहीं होता।
जाहिर है कि उनकी नजर में जनता के पैसे की कोई कद्र नहीं है। मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने अपने बड़बोले मंत्री की बात से असहमति जाहिर करते हुए माना है कि घोटाला चाहे 100 रुपये का हो, चाहे 100 करोड़ का, वह घोटाले ही है और इसकी जांच होनी चाहिए। हालांकि मुख्यमंत्री भी सीबीआई जांच न कराने के लिए रोज नई दलील दे रहे हैं। मंत्री और मुख्यमंत्री के सार्वजनिक रूप से परस्पर विरोधी बयान देने से सरकार की विश्वसनीयता गिर रही है। जरूरत इस बात की है कि अटपटे बयान देने की बजाए दवा घोटाले की विस्तृत जांच सीबीआई से कराई जाए।