फोटो: गायक उदित नारायण एक कार्यक्रम के सिलसिले में पटना आए थे।
पटना. हिन्दी सिनेमा जगत में संगीत के क्षेत्र में कई ऐसे नाम हैं जिन्हें हम सदाबहार गायकी के लिए जानते हैं। इनमें से उदित नारायण भी शामिल हैं। उनको बॉलीवुड में आज ऐसा गायक कहा जा सकता है जिन पर किसी बड़े गायक के अंदाज का असर नहीं दिखता है। यही शायद उनकी कामयाबी की बड़ी वजह है। अब तक वह 30 भाषाओं में करीब 15 हजार गीत गा चुके हैं।
उदित सिर झुकाकर बिहार की धरती को नमन करते हैं और कहते हैं 'आज मैं जो भी हूं, इस मिट्टी की बदौलत हूं।' कभी वह भोजपुरी में श्रोताओं से बात करते तो कभी मैथिली में। फिर कारवां मैलोडी संगीत की तरफ बढ़ता है और वह तेरे नाम..., जादू तेरी नजर..., नजर नजर, तेरी नजर... गाने गाकर श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर देते हैं। शनिवार को वह एक कार्यक्रम के सिलसिले में पटना आए थे। उनसे खास बातचीत की अभिमन्यु कुमार साहा ने...
20 हजार गाने गाने वाले उदित नारायण का जादू कम होता दिख रहा है। क्या कहेंगे आप?
मुझे ऐसा नहीं लग रहा है कि मेरा जादू कम हुआ है। वैसे लोग बोलते हैं कि तुम्हारी आवाज में पहले से ज्यादा निखार है। हां, पहले मेरा एकछत्र राज था, अब थोड़ा कम हैं। कम में बेहतर है तो वह मेरे लिए और भी अच्छा है।
आज के गाने के बोल बड़े अश्लील हो गए हैं। हिन्दी म्यूजिक इंडस्ट्री कहां जा रही है?
आपकी बातों में सच्चाई तो है। आज जो गाने बन रहे हैं, वो शॉर्ट टर्म के होते हैं।
हनी सिंह के गाने ज्यादा दिन नहीं चल पाते हैं। कुछ दिन क्रेज दिखता है, फिर समाप्त हो जाता है। गाने के बोल अश्लील हो गए हैं। वेस्टर्न टच ज्यादा गया है। गाने में शोर बढ़ता जा रहा है। आप पचास साल पहले का गाना सुनिए तो वह आज भी अच्छा लगता है। हिन्दी म्यूजिक इंडस्ट्री का ट्रैक थोड़ा चेंज हो गया है।
जब उनसे पूछा गया कि 80-90 के दशक के गाने लांग लास्टिंग हुआ करते थे। अब के गाने कुछ दिन में बोरिंग हो जाते हैं। क्या मानते हैं आप? आगे की स्लाइड्स में जानिए क्या दिया उन्होंने इस सवाल का जवाब...
फोटो: नेशात खान।