फोटो: फल्गु नदी को पार करने का यहां एक मात्र जरिया घड़े से बनी नाव को ही माना जाता है।
गया/पटना. इस वर्ष मौसम ने करवट बदला तो मानपुर (गया) के पास के दो गांवों के नाविकों (मल्लाहों) के भी दिन फिर गए। बारिश के कारण आम दिनों की अपेक्षा फल्गु नदी में काफी पानी आ गया है। आजकल पितृपक्ष मेले में उनकी अच्छी कमाई हो रही है।
पिंडदान करने के लिए लोगों को नदी पार जाना होता है और इसके लिए यहां एक मात्र सहारा नाव का ही है। पानी इतना भी ज्यादा नहीं होता कि बड़ी नाव चल सके। इसलिए यहां के नाविकों ने एक नई तकनीक से नाव बना डाली है। घड़े की नाव। इसकी एक खास विशेषता होती है कि नाविक इसे खींच कर पार ले जाते हैं। नदी में इतना ज्यादा पानी नहीं होता है कि नाविक के डूबने का खतरा हो। इसे स्थानीय लोग घड़नई कहते हैं। इस घड़नई से ये पिंडदानियों को देवघाट से सीताकुंड और सीताकुंड से देवघाट तक ले जाने का काम करते हैं।
20-25 घड़ों से बनती है एक नाव
यहां एक नाव 20 या 25 घड़ों से बनाई जाती है। इस नाव को बनाने में लगभग एक हजार रुपए का खर्च आता है। घड़नई के धंधे से करीब डेढ़ दर्जन से अधिक लोग जुड़े हैं। उन्हें मेले में पिंडदानियों और तीर्थ यात्रियों को घड़नई पर बैठाकर नदी पार कराने में अच्छी कमाई हो जाती है।
सीताकुंड के पास के मल्लाह टोली के लोग हैं इससे जुड़े
सीताकुंड के समीप बसे मल्लाह टोली और सलेमपुर गांव के करीब 15 से 20 परिवार इस पेशे से जुड़े हैं। इस पेशे से जुड़े उदय कुमार निषाद और श्रीराम केवट कहते हैं कि पिछले साल भी हमलोगों की ठीक-ठाक कमाई हो गई थी। इस वर्ष भी अच्छी आमदनी हो जाएगी। ये कहते हैं कि देवघाट से सीताकुंड जाने के लिए यही एक साधन होता है। सीताकुंड और रामगया दोनों महत्वपूृर्ण पिंडवेदियां हैं। ये दोनों फल्गु के पूर्वी छोर पर स्थित हैं।
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