पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर
डाउनलोड करेंपटना. नदी के रास्ते होने वाले अपराध को रोकने के लिए पटना के फतुहा में नदी थाना का निर्माण कराया गया था। पूरे तामझाम के साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसका उद्घाटन किया। बगैर नोटिफिकेशन के बने इस थाने में ढाई साल बीतने के बाद भी एक केस दर्ज नहीं हो सका। 56 लाख की लागत से बने इस थाना के औचित्य पर ही सवाल उठने लगे हैं। थाने के संसाधन खराब हो रहे हैं।
ढाई साल पहले पूरे 56 लाख रुपए खर्च कर फतुहा में नदी थाना स्थापित किया गया था। मौजीपुर में जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसका उद्घाटन किया था तो इस क्षेत्र के लोगों को विश्वास था कि नदियों के रास्ते होने वाली आपराधिक घटनाओं में कमी आएगी। लेकिन, नदी थाना आज तक अपने ही अधिकारों के लिए तरस रहा है
थाना के पास न तो अपना क्षेत्र है और न ही केस करने का अधिकार। यही कारण ही कि ढाई साल बीतने के बाद भी यहां एक भी प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई। यह हालत तब है जब स्टाफ की तनख्वाह पर 15 लाख रुपए खर्च हो चुके हैं। इस क्षेत्र में होने वाली घटनाओं को फतुहा थाना में दर्ज कराया जाता है।
पूरी तरह से नए बने इस थाने में हर जरूरी साधन जुटाए गए थे। बिजली की परेशानी न हो इसलिए बढिय़ा जनरेटर भी दिया गया था। अब यह खराब पड़ा है। स्टीमर की जगह अब नाव है। इसे चलाने के लिए प्रशिक्षित नाविक भी नहीं लगाए है। परिसर में अब कपड़े सूखते रहते हैं।
आगे की स्लाइड्स में पढ़िए पूरी खबर..
Copyright © 2021-22 DB Corp ltd., All Rights Reserved
This website follows the DNPA Code of Ethics.