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जुगाड़ तकनीक में माहिर हैं बिहारी, टूटी साइकिल से हल बना लिया

7 वर्ष पहले
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पटना. जुगाड़ तकनीक में बिहार के लोग माहिर होते हैं। कोई टूटे साइकिल से हल बना लेता है, तो कोई मोबाइल पंप सेट तैयार कर लेता है। बच्चों की प्रतिभा भी कम नहीं है। बांका के 10वीं कक्षा के एक छात्र ने ऑटोमेटिक सिंचाई प्रणाली विकसित की है।

सीतामढ़ी फारबिसगंज के योगी लाल सिंह ने टूटी हुई साइकिल को ही हल बना लिया। निचले हिस्से में कुदाली को नुकीला बना कर फार (जुताई के लिए उपकरण) तैयार किया। इसमें पहिया भी लगा है, जिससे आसानी से एक व्यक्ति दिन भर में 10 कट्ठा जमीन की जुताई कर सकता है। घटती जोत के लिए यह तकनीक काफी कारगर है। योगी लाल ने बताया कि उसके पास एक बीघा खेत है, जिसमें वह इससे धान और मक्का की फसल लगा लेता है।

10वीं के छात्र ने बनाया ऑटोमेटिक सिंचाई प्रणाली : बांका जिले के अद्वैत मिशन हाईस्कूल बौंसी के 10वीं कक्षा के छात्र आनंद गौरव ने ऑटोमेटिक सिंचाई प्रणाली विकसित की है। जब खेत में सिंचाई की जरूरत होगी, तो मोटर पंप खुद ब खुद चालू हो जाएगा और सिंचाई के बाद वह खुद बंद भी हो जाएगा। आनंद ने कहा कि शुरू से ही इलेक्ट्रॉनिक्स में उसकी रुचि रही है। खेत में पानी की बर्बादी रोकने के उद्देश्य से इस तकनीक को विकसित किया। उसने यह तकनीक आईसी, ट्रांजिस्टर, डायोड, केपिसिटर, रिले और ट्रांसफॉर्मर आदि का उपयोग कर बनाया है। इस प्रणाली के लिए उसे पूर्वी भारत विज्ञान मेले में द्वितीय पुरस्कार मिला।

महज चार माह में 15-20 किलो का हो जाएगा बकरा : पूर्णिया जिले के गणेश कुमार सिंह ने मोबाइल पंप सेट तैयार किया है। इसे साईकिल पर सेट कर दिया गया है। इस सेट को अकेले ही आसानी से खेत पर ले जाकर सिंचाई करने के बाद वापस लाया जा सकता है। वहीं, महेंद्र कुमार ने बकरी की नस्ल में सुधार कर पशुपालकों को अधिक लाभ दिलाने का प्रयास किया है। महेंद्र ने बताया कि देशी नस्ल ब्लैक बंगाल बकरी को जमुनापारी से क्रॉस करा कर बकरे की नस्ल तैयार की है। यह बकरा महज चार माह में 15 से 20 किलो का हो जाता है।