पटना. विधानसभाओं के उपचुनावों में अच्छे दिनों का असर लगातार कम पड़ता दिख रहा है। उत्तराखंड से भाजपा की हार होने का ऐसा सिलसिला शुरू हुआ, जो थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले दिनों बिहार में भी जदयू, राजद और कांग्रेस का महागठबंधन भाजपा पर भारी पड़ा था। उत्तरप्रदेश और गुजरात के भी परिणाम भाजपा के लिए चिंताजनक रहे हैं। इसे देखते हुए भाजपा के लिए अगले वर्ष बिहार में होने वाले विधानसभा के चुनाव के लिए बेहतर भविष्य नहीं दिख रहा है।
परिणामों के बाद भाजपा के नेता खुलकर तो कुछ नहीं कह रहे, लेकिन एक मायूसी जरूर दिख रही है। सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने मंथन की आवश्यकता जताई है, तो भाजपा नेता
सुशील कुमार मोदी के सुर कुछ अलग हैं।
परिणाम खुश होने लायक नहीं : शत्रु
भाजपा सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि उपचुनावों के परिणामों में खुश होने लायक नहीं नहीं हैं, लेकिन इससे निराश या हतोत्साहित होने की भी जरूरत नहीं है। इस तरह के परिणाम पहले भी आते रहे हैं। 1984 में भी कांग्रेस को लोकसभा चुनावों में अपार सफलता मिली थी, लेकिन उसके बाद कई राज्यों के चुनाव में उसकी जबरदस्त हार हुई। भाजपा को देखना होगा कि हमारी रणनीति कहां पर कमजोर पड़ रही है।
एक तरफ हम विकास का एजेंडा लेकर आए और उसके आधार पर देश में अपार सफलता मिली। उसके बाद क्या हो गया, जो उत्तराखंड में हार गए। बिहार में भी भरपूर सफलता नहीं मिली। हमारे पास अच्छा नेतृत्व है।
नरेंद्र मोदी का करिश्मा है। कमी तो हमलोगों में है। यह देखना होगा कि हम कहां पर खरे नहीं उतरे?
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