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CM के निशाने पर स्पीकर, पूर्व सांसद राजेश हत्या कांड की जांच करेगी सीबीआई

6 वर्ष पहले
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पटना. मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने पूर्व सांसद राजेश कुमार हत्या कांड की जांच सीबीआई से कराने की अपनी अनुशंसा कर दी है। मुख्यमंत्री के इस फैसले को वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य से जोड़कर देखा जा रहा है। इस जांच से स्पीकर उदय नारायण चौधरी की परेशानी बढ़ सकती है। तत्कालीन गया एसपी परेश सक्सेना ने अपरोक्ष रूप से इस मामले में स्पीकर उदय नारायण चौधरी को इस हत्या का साजिशकर्ता बताया था। राजनीति के जानकार मुख्यमंत्री के इस फैसले को स्पीकर को घेरने से देख रहे हैं।
लोजपा नेता रामविलास पासवान काफी पहले से इस मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग करते रहे हैं। इमामगंज विधान सभा क्षेत्र से लोजपा प्रत्याशी रहे पूर्व सांसद राजेश कुमार की 22 जनवरी 2005 में हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड की जब नए सिरे से तत्कालीन डीआईजी अरविंद पांडेय ने जांच शुरू किया तो उनका स्थानांतरण कर दिया गया था।
गया के तत्कालीन डीआईजी सुनील कुमार व एसपी संजय सिंह ने इस मामले को नक्सली वारदात करार देते हुए पूरे मामले को ठंढे बस्ते में डाल दिया था। राजेश कुमार के पुत्र व बोधगया के पूर्व विधायक सर्वजीत अपने पिता की हत्या मामले की जांच सीबीआई से कराने के लिए वर्ष 2006 में पटना हाइकोर्ट में एक अर्जी दायर की थी।
जिसके आलोक में हाईकोर्ट ने एक स्पेशल कोर्ट बहाल कर इस मामले की जांच व त्वरित निष्पादन का आदेश दिया था। लेकिन माननीय न्यायालय के आदेश के बाद भी ऐसा नहीं हो सका था। 2 अप्रैल 2008 को जब गया के तत्कालीन एसपी परेश सक्सेना डीआईजी अरविंद पांडेय के आदेश पर पूर्व सांसद हत्याकांड की जांच नए सिरे से शुरू कर दी।
उनकी ओर से सरकार को जो रिपोर्ट सौंपा, वह काफी चौंकाने वाला था। रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुआ, जबकि परेश सक्सेना की रिपोर्ट पर तत्कालीन डीआईजी अरविंद पांडेय ने भी अपनी सहमति की मुहर लगा दी थी।
उन्होंने अपनी रिपोर्ट में औरंगाबाद निवासी और पुलिस द्वारा कुछ माह पूर्व गिरफ्तार किए गए कुख्यात माओवादी कालिका यादव के बयान का हवाला देते हुए लिखा कि राजेश कुमार की हत्या कोई नक्सली घटना नहीं बल्कि यह पूर्ण रूप से प्लानिंग के तहत की गई हत्या है। उनकी हत्या गया लोकसभा क्षेत्र में उनके बढ़ते प्रभाव के कारण कुछ नक्सली नेताओं को पैसे देकर कराई गई। तत्कालीन गया एसपी परेश सक्सेना ने अपरोक्ष रूप से इस मामले में स्पीकर उदय नारायण चौधरी को इस हत्या का साजिशकर्ता बताया था।
यह रिपोर्ट तब जैसे ही सरकार को सौंपी गई तो उदय नारायण चौधरी इतने खफा हुए कि पितृपक्ष मेले के उद्घाटन के अवसर पर भरे मंच पर ही परेश सक्सेना को अपमानित किया था। मात्र पांच माह यानी 23 सितम्बर 2008 को उनका गया से तबादला कर उन्हें सेंटिंग पोस्ट में डाल दिया गया। इसके कुछ माह बाद ही डीआईजी अरविंद पांडेय का भी तबादला कर दिया गया। बिहार में चल रहे राजनीतिक उठापटक के बीच अब जबकि मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने 10 साल पुराने इस मामले की सीबीआई जांच की अनुशंसा कर दी है। इसके साथ ही कई राजनेताओं की सांसें भी अटक गई है।