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डाउनलोड करेंपटना. उम्र कोई भी हो। लगन है तो कुछ भी असंभव नहीं। पटना विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर गणित विभाग के प्रो. पीएन चौबे ने यह साबित कर दिखाया है। ये 64 साल के हैं और बुधवार को विवि के दीक्षांत समारोह में पीएचडी की
डिग्री हासिल करने के लिए खासे उत्साहित हैं।
सुनने में कुछ अटपटा लगा तो दोस्त और सहयोगियों ने टोका भी। लेकिन, प्रो. चौबे की दृढ़ इच्छाशक्ति ने किसी की नहीं सुनी। तीन वर्षों में पीएचडी पूरी कर ली। हालांकि उनकी ख्वाहिश थी कि पटना वीमेंस कॉलेज में संविदा पर नियुक्त उनकी लाड़ली अलका के साथ डिग्री लेने की।
प्रोफेसर साहब ने बताया कि उनकी बेटी की पीएचडी भी लगभग पूरी हो गई है। बस वायवा का रिजल्ट आना बाकी है। कहते हैं कि पूरे परिवार को गणित विषय से विशेष लगाव है। दूसरी बेटी दुबई में एक मल्टीनेशनल कंपनी में मैनेजर है। बड़ा बेटा गणित से एमएससी किया है और छोटा इंजीनियरिंग कर चुका है। विद्यार्थियों को सरल तरीके से गणित के सूत्रों को समझाना ही इनका प्रयास रहा है।
जिम्मेवारियों ने रोक रखा था
वर्ष 1983 में शिक्षक के पद पर स्वीकृत चयन समिति के माध्यम से कंफर्म होने के बाद प्रो चौबे ने कई बार पीएचडी करने की सोची। लेकिन, जिम्मेदारियों ने उन्हें इस उपलब्धि को हासिल करने से रोके रख। शिक्षक के रूप में कार्य करने का उनका जुनून ही था कि वे अन्य किसी ओर ध्यान नहीं दे सके। उन्हें रिजर्व बैंक व सेंट्रल बैंक से भी जॉब ऑफर किए गए, बेहतर पैकेज पर।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के छठे वेतनमान प्रस्ताव के लागू होने के बाद शिक्षकों की सेवानिवृत्ति की आयु सीमा 65 वर्ष हो गई। पीएचडीधारी शिक्षकों की महत्ता बढ़ी। 60 वर्ष की उम्र सीमा पार कर चुके थे। लेकिन, उनकी लगन ने पीछे मुड़कर देखने नहीं दिया।
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