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सच कहना अगर बगावत है, तो समझो कि हम बागी हैं : मुख्यमंत्री जीतन मांझी

7 वर्ष पहले
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पटना. मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि सच कहना अगर बगावत है, तो समझो कि हम बागी हैं। लोग हमको पागल समझेंगे फिर भी हम अपनी बात कहते रहेंगे। अगर कहीं गड़बड़ी है, तो कहने में कोई खराबी नहीं है। सरकारी स्कूलों को दुरुस्त करना पड़ेगा। अभी तो मास्टर साहब क्लास में आते ही टेबल पर पैर रखकर बैठ जाते हैं। बच्चों के सामने खैनी लगाने लगते हैं। कुछ चढ़ाने के ऐसे शौकीन हैं, जो घर जाते ही बेटे को कहेंगे कि आधा गिलास बनाकर लाओ।
बेटा भी इधर-उधर देखकर एक घूंट मार लेता है। मुख्यमंत्री रविवार को एसके मेमोरियल हॉल में पीपीपी मोड की शिक्षा और विकास में भूमिका विषय पर आइडियल आई द्वारा आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
खोई गरिमा पाने की कोशिश करें शिक्षक
उन्होंने कहा कि यह दुख की बात है कि हमारे शिक्षक गुरु की प्रतिष्ठा का ख्याल नहीं कर रहे हैं। एक चरित्रवान गुरु ही चरित्रवान शिष्य बना सकता है। शिक्षक बच्चों के चरित्र निर्माण का प्रयास नहीं कर रहे हैं। शिक्षक का समाज में बड़ा आदर और सम्मान है। इसके अनुरूप वे अपने आचरण में परिवर्तन लाएं और अपनी खोई गरिमा को पुन: वापस पाने के लिए प्रयत्नशील हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी स्कूलों की हालत परिवहन निगम की उस बस की तरह हो गई है, जिसमें टायर-ट्यूब और पुर्जा साल भर में बिक जाता है।
आवश्यकता है कि प्राइवेट और सरकारी स्कूलों में स्पर्धा की भावना लाई जाए। राज्य का बजट 1 लाख 16 हजार करोड़ का है। इनमें से 24 प्रतिशत से अधिक राशि शिक्षा क्षेत्र पर खर्च हो रही है। बिहार ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य है। विडंबना है कि सरकारी स्कूलों में बेहतर व्यवस्था के बावजूद वहां पढ़ाने वाले शिक्षक भी अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल में भेजते हैं। उन्हें ही सरकारी स्कूल की गुणवत्ता पर भरोसा नहीं है।
सरकारी शिक्षक अपने स्कूल में पढ़ाई की ऐसी व्यवस्था करें कि अभिभावक प्राइवेट स्कूलों को छोड़कर बच्चे का नामांकन सरकारी स्कूलों में कराएं। सरकार स्कूलों का स्तर सुधारने में पूरा सहयोग दे रही है। मौके पर नागरिक परिषद के महासचिव रामेश्वर प्रसाद यादव, महिला आयोग की अध्यक्ष अंजुम आरा, आइडियल आई के डॉ. शशि कुमार, मुकेश कुमार और पंकज कुमार ने भी विचार रखे। मुख्यमंत्री ने आइडियल आई के प्रतिभाशाली कार्यकर्ताओं को पुरस्कृत किया।
प्राइवेट स्कूलों के शिक्षकों को अधिक से अधिक 10 हजार रुपए मिलते हैं, फिर भी वे वहां पर दिल लगाकर पढ़ाते हैं। राज्य सरकार 40 हजार रुपए वेतन देती है, तो वे लोग जिंदाबाद-मुर्दाबाद और इंकलाब नारा लगाते हैं। -जीतन राम मांझी, मुख्यमंत्री