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मुख्यमंत्री मांझी बोले: अराजकीय 390 स्कूलों को प्रति छात्र मिलेंगे चार हजार रुपए

7 वर्ष पहले
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पटना. मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने घोषणा की कि अराजकीय 390 प्रारंभिक स्कूलों को प्रति नामांकित बच्चे पर सालाना 4000 रुपए सरकार देगी। इस राशि से शिक्षककर्मियों को वेतन देने के साथ अन्य कार्य किए जाएंगे। इतनी ही राशि आरटीई के तहत निजी स्कूलों में 25 फीसदी कोटे के तहत नामांकित प्रति गरीब बच्चा पर दी जाती है। यह राशि भविष्य में और बढ़ेगी। इसी आधार पर 390 स्कूलों को भी प्रति बच्चा राशि बढ़ेगी। अभी इन 390 स्कूलों का मामला न्यायालय में है, इसलिए हम कोई घोषणा नहीं कर सकते हैं।
मुख्यमंत्री गुरुवार को श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में बिहार राज्य अराजकीय प्रारंभिक शिक्षक संघर्ष मोर्चा के तत्वावधान में आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे। उक्त घोषणा का लाभ 6000 शिक्षककर्मियों को मिलेगा। ये वैसे 390 स्कूल हैं, जिनके सरकारीकरण की मांग लंबे समय से चल रही है। सीएम ने कहा- सोच कर आया था कि इन स्कूलों के शिक्षकों-कर्मचारियों के लिए ऐसी घोषणा करूंगा कि सभी खुशी-खुशी घर जाएं। शिक्षकों का हाल जानकर मैं दुखी हूं।
20-25 साल से ये बिना वेतन काम कर रहे हैं। लेकिन, यहां मुझे जानकारी दी गई कि यह मामला न्यायालय में है। फिलहाल, सरकार का निर्णय है कि किसी भी स्कूल व कॉलेजों का सरकारीकरण नहीं होगा। लेकिन, इसमें परिवर्तन किया जा सकता है। इस मामले को कोर्ट से बाहर आने दें। अगर पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इन स्कूलों का सरकारीकरण करने की बात कही थी, तो निश्चित रूप से इसे पूरा किया जाएगा।
एक लाख शिक्षकों की जरूरत
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में साढ़े पांच लाख स्कूली शिक्षक हैं। छात्र-शिक्षक का अनुपात 40:1 करने के लिए अभी और एक लाख शिक्षकों की जरूरत है। राज्य में 70 हजार प्राथमिक विद्यालय हैं। इसी प्रकार और 9000 स्कूलों की जरूरत है। सम्मेलन में मोर्चा के महामंत्री श्रवण कुमार, बाल श्रमिक आयोग के अध्यक्ष चंदेश्वर प्रसाद चंद्रवंशी के अलावा शोभा, अरुण कुमार वर्मा, सीताराम दुखारी, नरेंद्र सिंह कुशवाहा, श्यामदेव चंद्रवंशी आदि ने बातें रखीं।
भाषाई शिक्षकों की जल्द हो बहाली
उधर, अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय ने राज्य में उर्दू, मैथिली और बंगला समेत अन्य भाषाओं के शिक्षकों की जल्द बहाली करने की जरूरत जताई है। गुरुवार को मंत्रालय के आयुक्त (भाषाजात) प्रो. अख्तरुल वासे ने 1 अणे मार्ग जाकर मुख्यमंत्री से मुलाकात की। कहा- भाषा के आधार पर गठित अकादमियों में विशेषज्ञों की नियुक्ति होनी चाहिए। अल्पसंख्यक भाषा की जो संस्थाएं हैं, उन्हें शिक्षण संस्थानों की तर्ज पर मान्यता दी जाए। इसपर मुख्यमंत्री ने प्रधान सचिव आमिर सुबहानी को प्रो. वासे के सुझावों पर एक प्रस्ताव तैयार करने का आदेश दिया।