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मुख्यमंत्री का एक और विवादस्पद बयान, कहा मेरे पूजा के बाद धुलवाई गई थी \'मंदिर की मूर्ति\'

7 वर्ष पहले
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पटना. बदलते बिहार के दावों के बीच मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने यह कह कर राजनीतिक भूचाल मचा दिया है मुधबनी के एक मंदिर में उनकी पूजा करने के बाद मंदिर की मूर्ति धुलवाई गई थी। रविवार को सर्पेन्टाइन रोड में पूर्व मुख्यमंत्री भोला पासवान शास्त्री की जयंती पर आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री ने ये बातें कही। सीएम ने कहा मुझे आज भी दलित समझा जाता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके पूजा करने की बाद मूर्ति को धुलवाने की बात उन्हें खान मंत्री रामलषण राम रमण ने बताई थी। मैंने इस घटना को खुद देखा नहीं है, सिर्फ सुना है। मैं वही बात लोगों के बीच कह रहा हूं जो मुझे रमण ने बताई थी। मुझे इस घटना से बहुत दुख हुआ था।
मुख्यमंत्री ने कहा अनुसूचित जाति में जन्म लेना मेरा कसूर बन गया है। कोई दलित तो मेरा पैर नहीं छूता है। हद तो यह है कि मेरे पास काम कराने आने वालों को मेरे पैर छूने में दिक्कत नहीं होती है लेकिन उसके मन में क्या रहता है, वह तो मधुबनी की घटना से ही पता चल गया। सोचिए आज भी हम कहां खड़े हैं।
जदयू ने घटना से किया इंकार
जदयू ने मुख्यमंत्री द्वारा लगाए गए आरोपों से इंकार कर दिया है। पार्टी के एमएलसी और मधुबनी निवासी विनोद सिंह ने कहा कि मंदिर या मूर्ति को धुलवाने जैसी कोई घटना नहीं हुई थी।
मुख्यमंत्री विधानसभा के उपचुनाव में प्रचार के दौरान 18 अगस्त को अंधराठाढ़ी के परमेश्वरी मंदिर में पूजा करने गए थे। मंदिर में उनका भव्य स्वागत हुआ। वहां उन्हें तोहफे दिए गए। खान मंत्री रामलषण राम रमण तो वहां थे भी नहीं। मंदिर में मैं और ग्रामीण विकास मंत्री नीतीश मिश्रा साथ थे।
हो सकता है रमण को किसी व्यक्ति ने गलत जानकारी दे दी हो। लेकिन उन्हें मुख्यमंत्री को गलत जानकारी देने की बजाए इसकी जांच करानी चाहिए थी। मैं दुर्गापूजा के बाद पटना आने पर मुख्यमंत्री से मिलकर उन्हें सच्चाई से अवगत कराऊंगा।

लंदन में बोले बिहार में आज भी है सामंतवाद
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में समाज आज भी सामंतवादी व्यवस्था से प्रभावित है। सामन्तवादी मानसिकता का आज भी संस्थाओं पर गहरा प्रभाव है। सामन्ती स्वभाव और सामन्ती सिद्धांत बिहार के पिछड़े समुदायों की प्रगति में बाधक है।
मैंने खुद इसे कई तरह से अनुभव किया है। मेरे पिता बंधुआ मजदूर के रूप में एक सवर्ण जमींदार के यहां काम किया करते थे। मैं जमींदार के जानवरों को चराया करता था। इसके बदले मुझे खाना मिलता था। मेरे पिता मुझे पढ़ाना चाहते थे। यह बात जमींदार को बताई गई तो उन्हें पीटा गया।