पटना. मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि सच कहना अगर बगावत है तो समझो की हम बागी हैं। लोग हमको पागल समझेंगे फिर भी हम अपनी बात कहते रहेंगे। अगर कहीं गड़बड़ी है तो कहने में कोई खराबी नहीं है। सरकारी स्कूलों को दुरुस्त करना पड़ेगा। अभी तो मास्टर साहब क्लास में आते टेबल पर पैर रख कर बैठ जाएंगे।
बच्चों के सामने खैनी लगाने लगेंगे। कुछ चढ़ाने के ऐसे शौकीन हैं जो घर जाते ही बेटे को कहेंगे कि आधा गिलास बनाकर लाओ। बेटा भी इधर-उधर देख कर एक घूंट मार लेता है। मुख्यमंत्री रविवार को एस.के. मेमोरियल हॉल में आइडियल आई द्वारा आयोजित रोल ऑफ पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशीप मोड इन एजुकेशन एंड डेवलपमेंट इन बिहार विषय पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह दुख की बात है, हमारे शिक्षक गुरु जैसे सम्मानजनक शब्द की प्रतिष्ठा का ख्याल नहीं कर रहे हैं। एक चरित्रवान गुरु ही चरित्रवान शिष्य बना सकता है। शिक्षक बच्चों के चरित्र निर्माण और उन्हें सम्पूर्ण शिक्षा दिए जाने का प्रयास नहीं कर रहे हैं।
शिक्षक का समाज में बड़ा आदर और सम्मान है। इसके अनुरूप वे अपने आचरण में परिवर्तन लाएं और अपनी खोई गरिमा को पुन: वापस लाने के लिए प्रयत्नशील हो।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राइवेट स्कूलों के शिक्षकों को अधिक से अधिक 10 हजार रुपये मिलते हैं, फिर भी वे वहां पर दिल लगाकर पढ़ाते हैं। राज्य सरकार उन्हें 40 हजार रुपये वेतन देती है तो वे लोग जिंदाबाद-मुर्दाबाद और इंकलाब नारा लगाते हैं।
सरकारी स्कूलों की हालत परिवहन निगम की उस बस की तरह हो गई है जिसकी टायर-ट्यूब और पूर्जा तक साल भर में बिक जाता है। वहीं प्राइवेट स्कूल का कारोबार बढ़ता ही जाता है। आवश्यकता है कि प्राइवेट और सरकारी स्कूलों में स्पद्र्धा की भावना लायी जाए।