पटना. नगर विकास विभाग से निगम को भंग करने के लिए मिले नोटिस के खेल में पार्षद उलझ गए हैं। कोई जवाब के लिए वकील का सहारा लेने की बात कर रहा है तो कई स्पष्टीकरण के सवालों को आधारहीन और बेतुका बताकर खुद ही जवाब देने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि अब भी सभी पार्षदों नोटिस नहीं मिला है। जिन्हें नोटिस मिल गया है, वे परेशान हैं। जिन्हें नहीं मिला है, वे बेचैन हैं। विपक्षी पार्षदों का आक्रोश मंत्री सम्राट चौधरी पर है। उनका गुस्सा सड़कों पर दिख रहा है। 12 दिसंबर तक सभी पार्षदों को जवाब देना है।
इतने कम समय में कैसे स्पष्टीकरण देंगे, इसके लिए एक पार्षद दूसरे से संपर्क कर रहे हैं। उन्हें डर है कि अगर समय पर विभाग को जवाब नहीं मिला तो निगम भंग करने की कार्रवाई शुरू हो जाएगी। वहीं, कुछ पार्षद आश्वस्त हैं कि विभाग हर हाल में निगम को भंग करेगा। नोटिस तो मात्र दिखावा है।
एक भी सवाल में न तो पार्षद शामिल हैं, न इसके दोषी हैं
डिप्टी मेयर रूप नारायण मेहता, पार्षद विनय कुमार पप्पू, दीपक कुमार चौरसिया, धमेंद्र प्रसाद मुन्ना, जीत आदि पार्षदों ने कहा है कि विभाग ने स्पष्टीकरण के लिए जिन-जिन बिंदुओं पर सवाल उठाया है, वे सभी आउट ऑफ सिलेबस हैं। एक भी सवाल में न तो पार्षद शामिल हैं और न ही इसके लिए वे दोषी हैं। नोटिस देना सिर्फ खानापूर्ति है। विभाग निगम भंग करने की तैयारी कर चुका है। यही वजह है कि आठ दिसंबर का लेटर कुछ पार्षदों को 10 दिसंबर को मिला तो कई को मिला ही नहीं।
पार्षदों ने निकाला मशाल जुलूस
निगम भंग करने की सिफारिश के विरुद्ध पार्षदों ने मशाल जुलूस निकाला। कहा कि विरोध-प्रदर्शन जारी रहेगा। हर स्तर पर विरोध किया जाएगा। जुलूस में डिप्टी मेयर आरएन मेहता, दीपक कुमार चौरसिया, जीत कुमार, हेमलता वर्मा, प्रेमलता देवी, सुधीर कुमार, तरूणा राय आदि ने भाग लिया।