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नक्सलियों से लोहा लेने के लिए तैयार हैं जवान

9 वर्ष पहले
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पटना। नक्सल गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए अर्धसैनिक बलों ने विशेष रणनीति तैयार की है। मिनिस्टरी ऑफ होम अफेयर (एमएचए) ने भी इसमें पूरी मदद की है। सीआरपीएफ के वरीय अधिकारियों के मुताबिक झारखंड और बिहार को जल्द ही सीआरपीएफ की दो-दो बटालियन और सशस्त्र सीमा बल(एसएसबी) की एक-एक बटालियन मिलने वाली है। झारखंड और बिहार में बढ़ रही नक्सल गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए एमएचए ने इसकी स्वीकृति प्रदान कर दी है। फिलहाल झारखंड में कोबरा सहित सीआरपीएफ की 19 बटालियन है। दो नए बटालियन मिलने से यहां अर्धसैनिक बलों की संख्या में इजाफा होगी। इसी तरह बिहार में एक कोबरा सहित कुल 6 सीआरपीएफ बटालियन है। सीआरपीएफ डीआईजी उमेश कुमार ने कहा कि जवानों की संख्या में इजाफा होने से नक्सली अभियान में काफी मदद मिलेगी।
नक्सल अभियान में एसएसबी
ऐसा पहली बार होगा जब एसएसबी जवानों को नक्सल अभियान में लगाया जाएगा। इससे पहले एसएसबी जवानों को सीमा सुरक्षा और चुनाव के दौरान लगाया जाता था। बिहार, झारखंड के अलावा छत्तीसगढ़ को भी एसएसबी की एक बटालियन नक्सल गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए दी जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक फिलहाल एसएसबी जवानों को असम पंचायत चुनाव के लिए भेजा गया है।
एंटी लैंड माइंस गाड़ियां हों और मजबूत
नक्सल विरोधी अभियान में लगे अधिकारियों का मानना है कि एंटी लैंड माइंस गाड़ियों को और मजबूत होना चाहिए। पहले नक्सली कम मारक क्षमता वाले बारूदी सुरंग का इस्तेमाल करते थे। लेकिन अब वे ज्यादा खतरनाक विस्फोटक का इस्तेमाल कर रहे हैं। खास कर लैंड माइंस गाड़ियों के इंजन के हिस्से पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।
डुमरिया होगा सीआरपीएफ के हवाले : औरंगाबाद और झारखंड के पलामू जिला की सीमा से सटे डुमरिया जंगल को पूरी तरह सीआरपीएफ के हवाले करने की योजना है। सीआरपीएफ बिहार सेक्टर के आईजी मुकेश सिन्हा ने बताया किगया के चकरबंधा और बरहा इलाके में सीआरपीएफ बलों का मूवमेंट बढ़ाया जाएगा। एसएसबी जवानों को मुंगेर, हवेली खड़गपुर, कजरा आदि स्थानों पर लगाया जा सकता है।