पटना। दुनिया भर में खूब पढ़ी जाने वाली 'द अलकेमस्टि' में पावलो कोएल्हो लिखते हैं कि अगर आपके इरादे ठीक हैं और आप कुछ करना चाहते हैं तो पूरा कायनात आपके साथ होता है। यूपीएससी की परीक्षा में 18 वां रैंक लाने वाली तनु प्रिया जब इस चर्चित उपन्यास को पढ़ रही थी कि यह बात मन के किसी कोने में जज्ब हो गयी। जिंदगी चलने का नाम है तो तनु की जिंदगी भी चलती रही। 2004 में पटना के आरपीएस से दसवीं और उसके बाद दो साल बाद सीबीएसई की परीक्षा में चुने जाने के बाद डेंटल में एडमिशन लिया। रोहतक में नामांकन हुआ। मूल रूप से समस्तीपुर के कल्याणपुर की रहने वाली तनु के पैरेंट अब पटना से सटे दानापुर में रहते हैं।
पढ़ाई के बाद तनु अखबार वगैरह ही देख पाती थीं। चौथे साल में उन्हें लगा कि मुझे तो सिविल सर्विस की तैयारी करनी है। यहां आकर वह सीरियस हुईं। हर दिन तीन-चार घंटे का वक्त निकाला। खुद से तैयारी शुरू की। वह कहती हैं: आपको तय करना होता है कि क्या नहीं पढऩा है। एक साथ बहुत चीजें पढ़ेंगे तो आपका फोकस एरिया प्रभावित हो सकता है।
इसी बीच रोहतक में इंटर्नशीप करना पड़ा। सिविल सर्विस की तैयारी और इंटर्नशीप दोनों काम एक साथ करना पड़ा। पढ़ाई में क्रमबद्धता बनी रही। क्या किसी गाइड की जरूरत महसूस नहीं हुई? तनु ने कहा: नेट पर एक साइट के बारे में पता चला। वहां गयी। कोई मृणाल पटेल हैं जो तैयारी करने वालों को गाइड करते हैं। हमने भी उनसे संपर्क किया। उनका सहयोग मिला। लेकिन इसके पहले पिता का हमारी तैयारी में बड़ी भूमिका रही।
आगे की स्लाइड्स में जानें एलआईसी एजेंट की इस बेटी की क्या है ख्वाहिश...