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झाड़ियों-गड्‌ढों वाले मैदान को पार्क कहें तो कैसे?

7 वर्ष पहले
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(के. सेक्टर पार्क कंकड़बाग)
पटना. राजधानी के कुल 70 पार्कों में सबसे ज्यादा कंकड़बाग इलाके में हैं। इनमें कुछ में मेंटेनेंस तो दूर पार्क की मूलभूत सुविधाएं तक नहीं हैं। पांच पार्कों की पड़ताल में एक झाड़ी में तब्दील मिल तो एक पर सांसद कोटे के फंड से कई निर्माण कार्यों का शिलापट्‌ट लगने के बाद भी यह उबड़-खाबड़ मैदान बना है। पांच में से एक ही पार्क में मेंटेनेंस दिखाई दिया, जबकि तीन उपयोग के लायक भी नहीं है।
के. सेक्टर पार्क कंकड़बाग
यह पार्क अब ऊबड़-खाबड़ मैदान में तब्दील हो गया है। निर्माण बिहार राज्य पुल निर्माण विभाग ने कराया था। इसका उपयोग पूरी तरह से बंद है। पार्क में सांसद शत्रुघ्न सिन्हा के फंड से ट्यूबवेल बोरिंग फाउंटेन, बिजली और पार्क के सबंधित अन्य कार्य का पट्ट लगाया गया। काम का जिम्मा ग्रामीण कार्य विभाग प्रमंडल-दो को सौंपा गया था। लेकिन, स्थानीय लोगों के मुताबिक पट्ट लगाने के बाद अब तक कोई काम नहीं हुआ। पार्क में एक भी पौधा नहीं है। इसमें अलग-बगल के लोग कूड़ा फेंकते हैं। निर्माण के बाद इसका मेंटेनेंस पथ निर्माण के पास था, लेकिन नए आदेश में बिहार राज्य आवास बोर्ड की सूची में रखा गया है।
कांग्रेस मैदान कदमकुआं
इलाके का यह सबसे पुराना पार्क मेंटेनेंस नहीं होने की वजह से बदहाल है। पार्क के नाम पर अब सूखा मैदान बचा है। मेंटेनेंस के लिए एक माली है। इसके चारों तरफ अतिक्रमण है। साफ-सफाई नहीं होने की वजह से अंदर कूड़ा बिखरा हुआ है। लाइट आदि की व्यवस्था नहीं होने की वजह से रात के समय असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है। इसकी वजह से स्थानीय लोग यहां आने से कतराते हैं। पार्क का निर्माण 1964 में कराया गया था। सौंदर्यीकरण के लिए प्रोजेक्ट बना था, लेकिन इस पर कुछ नहीं हुआ। निर्माण ग्रामीण कार्य विभाग ने कराया था। नई सूची में इसका जिम्मा बुडको के पास है।
भूतनाथ हाउसिंग काॅलोनी, टीवी टॉवर के पास का पार्क, कंकड़बाग
इस पार्क के नजदीक एक अन्य पार्क भी हैं : यह पार्क अब झाड़ियों में तब्दील हो चुका है। आसपास के घरों के सीवरेज और बारिश की वजह से यह तालाब बना हुआ है। काम के लिए कुछ लाए गए पाइप समेत अन्य सामान रखे गए है। तीन साल पहले खूबसूरती के लिए पौधों में ज्यादातर गायब हो गए हैं। पार्क के निर्माण ग्रामीण कार्य विभाग दो ने कराया था। शुरुआत में इसके मेंटेनेंस की जिम्मेदारी बीईएसआईडीसी के पास थी, हस्तांतरण के बाद अब इसकी जिम्मेदारी आवास बोर्ड के पास है।
पड़ताल के दौरान दूसरा पार्क मेंटेन दिखा। इसका उपयोग भी किया होता है। पार्क में लाइट से लेकर घास कटिंग सब कुछ बेहतर था। इसका निर्माण ग्रामीण कार्य विभाग ने कराया था। शुरुआत में इसके मेंटेनेंस की जिम्मेदारी बीईएसआईडीसी के पास थी, लेकिन अब राज्य आवास बोर्ड के पास है।
वार्ड नंबर 43 में बना पार्क
पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी के घर के पास बना यह पार्क मेंटेन तो है, लेकिन इसके उपयोग की इजाजत सुबह के चार घंटे ही है। इसके बाद यह पूरी तरह बंद रहता है। स्थानीय लोगों के मुताबिक करीब माह भर पहले शाम के समय पार्क में मारपीट हुई थी। इसके बाद एक सप्ताह तक पार्क को पूरी तरह से बंद रखा गया था। इसके बाद इसे सुबह खोलने का निर्णय लिया गया, बाकी समय पार्क बंद रहता है। पार्क में चार माली होने के बावजूद इसके चारों तरफ कूड़े का ढेर पड़ा रहता है। पार्क में रात में सैर के लिए सोलर लाइट लगाई गई थी। निर्माण के दो साल बाद से यह बंद पड़ा है। इसे कभी ठीक करने की कोशिश भी नहीं की गई है। पार्क का निर्माण ग्रामीण कार्य विभाग ने कराया था। नई सूची में मेंटेनेंस का जिम्मा बुडको के हिस्से है, लेकिन यहां अब भी पटना नगर निगम के माली तैनात थे।
आगे की स्लाइड्स में देखें पार्कों की दुर्दशा की तस्वीरें