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डाउनलोड करेंपटना. आज सुबह में ही जमुई से पत्नी को लेकर यहां आया हूं। उसकी हालत बहुत खराब है। इमरजेंसी में भर्ती कर लिया है। पर शाम के चार बजे गए पर क चमेलिया इमरजेंसी में बेड पर लेटी हुई है। कराह रही है। अभी तक एको डॉक्टर नहीं आए साहब...। इतना कहते-कहते बासुदेव की आंखें भर आईं। वह दर्द से परेशान पत्नी के पास बैठकर उसे निहार रहा है और उसे ढांढ़स दे रहा है। कुछ देर बर्दाश्त करो। इलाज शुरू होगा। उन्होंने कहा-चमेलिया को घाव हो गया है जिसका आपरेशन करना जरूरी है। कुछ लोग आए थे और पूछ के चले गए। पहले पता होता तो यहां आते ही नहीं। बड़ी उम्मीद लेकर आए थे।
इस बीच चमेलिया सोने की कोशिश कर रही है पर तकलीफ उसे नींद नहीं आ रही है। वासुदेव से कोई कुछ पूछता है तो चमेलिया सिर से कंबल हटाकर उसे टुकटुक देखने लगती है। शायद कहीं वह इलाज करने वाले डॉक्टर बाबू तो नहीं। वासुदेव की माने तो कोई परिचित भी नहीं है। जिससे वह पैरवी करके इलाज करा ले।इसी इंतजार में सुबह से शाम हो गया पर, इलाज की समुचित व्यवस्था नहीं हुई है। हालांकि वासुदेव ने उम्मीद नहीं छोड़ी है। उसे हर पल लगता है कि अब कोई डॉक्टर बाबू आएंगे और उसकी पत्नी का इलाज शुरू हो जाएगा। गांव के लोगों ने कहा था कि पीएमसीएच बहुत बड़ा अस्पताल है। पत्नी को वहीं ले जाओ। सब ठीक हो जाएगा। पर यहां कि स्थिति से तो उसे डर लगने लगा है।
एक डॉक्टर ने कहा-दूसरे विभाग का हूं
दोपहर के दो बजे हैं। समस्तीपुर के अनीता देवी मंगलवार को इमरजेंसी में भर्ती है। उसका शरीर जल गया है। उसके होठ सूख रहे हैं। घर वाले भी परेशान हैं। क्या करें कहां ले जाए।
घरवालों ने कहा कि एक डॉक्टर आए थे पर उन्होंने कहा कि वे दूसरे विभाग के हैं। इसलिए चेक नहीं कर सकते। घरवालों ने कहा कि किसी ने बर्न वार्ड में भेजा ही न हीं। इमरजेंसी में भर्ती देवनारायण के परिजन भी हड़ताल से घबराए हुए थे। पता नहीं क्या होगा। यदि हड़ताल जारी रहा तो क्या होगा?
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