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आर्थिक सर्वेक्षण: पटना के लोगों की कमाई में 9 प्रतिशत का इजाफा

वर्ष 2010-11 की तुलना में वर्ष 2011-12 में पटना के लोगों की कमाई 9 प्रतिशत बढ़ी है।

Dainik Bhaskar

Mar 12, 2015, 03:24 AM IST
Economy survey of patna
पटना. राज्य का आर्थिक सर्वेक्षण पटना के लिए खुशखबर बनकर आया है। हर बार की तरह इस बार भी पटना को राज्य के सबसे समृद्ध जिले का दर्जा दिया गया है। बुधवार को जारी आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़ों में कहा गया है कि प्रति व्यक्ति सकल जिला घरेलू उत्पाद में पटना अव्वल है। सामान्य भाषा में समझें कि पटना की प्रति व्यक्ति आय में लगातार वृद्धि हो रही है। वर्ष 2010-11 की तुलना में वर्ष 2011-12 में पटना के लोगों की कमाई 9 प्रतिशत बढ़ी है। जिले का हर शख्स सालाना 63063 रुपए कमा रहा है।

राज्य की आबादी में पटना का हिस्सा 5.6 प्रतिशत है। जाहिर है, पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की खपत यहां राज्य में सबसे ज्यादा है। पेट्रोलियम पदार्थों की ज्यादा खपत भी समृद्धि की निशानी मानी जाती है। वर्ष 2013-14 में पटना के लोगों ने 55742 मीट्रिक टन पेट्रोल की खपत की। इसी साल 2 लाख 7 हजार 48 मीट्रिक टन डीजल की खपत हुई। एलपीजी की खपत 92815 मीट्रिक टन हुई। राज्य का कोई और जिला इसकी एक चौथाई खपत भी नहीं कर सका। दूसरे नंबर पर वैशाली जिला रहा है, जहां के लोगों ने सालभर में 23913 मीट्रिक टन एलपीजी की खपत की।
लगातार बढ़ रही प्रति व्यक्ति आय
पटना जिले की प्रति व्यक्ति आय पिछले पांच साल से लगातार बढ़ रही है। वित्तीय वर्ष 2007-08 से लेकर 2011-12 तक के जारी आंकड़ों में औसतन दस प्रतिशत की वृद्धि हर साल हुई है। इसके आगे के आंकड़े उपलब्ध नहीं, मगर रुझान पिछले रिकॉर्ड के तरह ही हैं। दूसरे नंबर पर मुंगेर जिला है, जहां की प्रति व्यक्ति आय 22051 रुपए है। तीसरे नंबर पर बेगूसराय है। यहां के लोगों की प्रति व्यक्ति आय 17587 रुपए है।
डाल ली बचत की आदत
पटना जिले के लोगों ने बचत की खराब आदत को सुधार लिया है। वर्ष 2012-13 में 144 करोड़ रुपए बचत का लक्ष्य था। जबकि लोगों ने बैंकों में बचत राशि 65 करोड़ ही जमा कराई। बचत की खराब आदत को देखते हुए वर्ष 2013-14 में लक्ष्य 96 करोड़ ही रखा गया। आश्चर्यजनक रूप से पटना के लोगों ने इस साल 210 करोड़ रुपए बचत खातों में जमा कराए। इस मामले में भी पटना राज्य में एक साल में सबसे ज्यादा बचत करने वाला जिला बन गया है। पिछले वर्षों के खराब रिकॉर्ड की वजह से तीन साल में औसत बचत हर साल 81 करोड़ रही। तीन साल के औसत के लिहाज से पटना नंबर वन नहीं रहा। इस मामले में सारण जिले ने बाजी मारी।
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