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निर्वाचन प्राधिकार का सिरदर्द बना पैक्स चुनाव, चुनाव संपन्न होने पर लगा प्रश्नचिह्न

7 वर्ष पहले
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पटना. 8171 पैक्स का चुनाव कराना राज्य निर्वाचन प्राधिकार के लिए सिरदर्द बन गया है। हजारों शिकायतें लंबित हैं। चुनाव के पहले ही प्रखंड कार्यालय भी अखाड़ा बन गया है। मतदाता सूची में नाम सुधरवाने को प्रखंड मुख्यालयों में हंगामा जारी है। अभी तक मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन पूरा नहीं हो सका है। बूथ का भी निर्धारण नहीं हो पाया है। ऐसे में शांतिपूर्ण तरीके से निर्धारित समय पर चुनाव संपन्न होने की संभावना कम है।
मतदाता सूची में नाम व अन्य अशुद्धियों को नामांकन तिथि से 10 दिन पूर्व तक सुधार करने का प्रावधान है। इसके लिए प्राधिकार ने पहले ही सभी डीएम व संबंधित अधिकारियों को पत्र भेज दिया था। प्राधिकार की ओर से बीडीओ और प्रखंड सहकारिता पदाधिकारियों को शांतिपूर्ण तरीके से चुनाव पूरा कराने के लिए प्रशिक्षण दिया गया है।
29 सितंबर से 19 अक्टूबर तक छह चरणों में 8171 पैक्स का मतदान होना है। औपबंधिक मतदाता सूची में 1.35 करोड़ मतदाता हैं। मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की शिकायत राज्य निर्वाचन प्राधिकार को मिल रही है। 2009 के चुनाव में भाग ले चुके सदस्यों के भी नाम गलत तरीके से हटाने की शिकायत है।
पैक्स चुनाव के पहले भ्रष्टाचार भी
मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए टनकुप्पा के बीडीओ शेष कुमार को 20 हजार रुपए घूस लेते गिरफ्तार किया गया।
मिल रहीं ऐसी शिकायतें
कम मतदाता वाले गांव में बूथ बनाने की अनुशंसा
2009 के चुनाव में भाग लेने वाले मतदाताओं के नाम जबरन हटाए गए
गलत तरीके से मतदाता सूची में नाम जोड़ना