फोटो- अस्पताल में दारू पार्टी, आगे देखिए दारू पार्टी से जुड़ी हुई कुछ और तस्वीरें...
पटना। राजधानी का सबसे बड़े अस्पताल पीएमसीएच के इमरजेंसी में शाम ढलते ही लोग शराब पीना शुरू कर दे रहे हैं। 1765 कुल बेड के इस अस्पताल में 100 बेड इमरजेंसी का भी है। दिनभर तो यहां सुरक्षा के लिए सेक्युरिटी गार्ड खड़े रहते हैं, लेकिन रात 10 बजे के बाद सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं रहती। यही कारण है कि मरीजों के साथ एक-दो के बदले 10 से 12 अटेंडेंट अंदर पहुंच जाते हैं।
दो नर्सों के भरोसे आखिरकार किसी तरह हॉस्पिटल को चलाया जाता है। जब कभी मरीज हुड़दंग मचाते हैं तो अस्पताल प्रशासन तो कहीं दिखाई नहीं देता। लोगों को पुलिस के कंट्रोल रूम के हवाले रहना पड़ता है।
11 दिसंबर की रात भी कुछ एेसा ही हुआ। रात के 11 बजे जीएच वार्ड बेड नंबर ११ पर अचानक गंभीर रूप से घायल एक मरीज पहुंचा। वह पूरी तरह घायल था और परेशान। कुछ देर तक तो सबकुछ सामान्य रहा, लेकिन रात ढलते ही इलाज के साथ-साथ उसके अटेंडेंट की संख्या बढ़ती गई।
10 से 15 की संख्या में पहुंचे अटेंडेंट ने वहां आसपास के मरीजों के बिस्तरों पर भी कब्जा जमाना शुरू कर दिया। इन लड़कों के आतंक से लोग पूरी तरह सिहर गए। इसी बीच फतुहा से गोली लगे अधिवक्ता पहुंचे, जिन्हें बेड नंबर 10 पर शिफ्ट किया गया। उनके अटेंडेंट मो. सलाम
इराकी ने पहले डॉक्टरों और नर्सों के कंप्लेन करनी चाही।
उन्हें जब पता चला कि यहां तो कोई सेक्युरिटी गार्ड भी मौजूद नहीं है। यह सब देखकर उन्होंने तुरंत ही पुलिस कंट्रोल रूम को फोन किया। आधे घंटे के बाद पीरबहोर थाना पहुंची और ११ नंबर बेड पर बैठकर शराब पी रहे लड़कों को दबोच लिया। पकड़े गए सभी लड़कों का फोन नंबर जब्त करने के बाद पुलिस उन्हें थाने ले गई।
आठ लड़कों का नाम-पता लोगों ने लिखवाया
डीबी स्टार के पास उन सभी आठ लड़कों के नाम, पता और फोन नंबर लिखी गई कॉपी मौजूद है। हमने उन लड़कों से बातचीत भी की, उन्होंने कहा कि गलती से एेसा हुआ है, उन्हें पता नहीं था कि अस्पताल में बैठकर शराब नहीं पीना चाहिए।
लोग डरे सहमे रहते हैं
11 दिसंबर को फतुहा में मेरे चाचा को गोली लगी थी। हमलोग पीएमसीएच इमरजेंसी पहुंचे। वहां जीएच वार्ड में बेड नंबर 11 अलॉट हुआ। हमने आसपास गतिविधि देखकर रात को ही वहां से घर चले जाने का फैसला किया। वहां सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है। रात को लोग डरे सहमे रहते हैं।
मो. मिराज, मरीज अटेंडेंट
हमने पुलिस को फोन किया
अपने बिस्तर के आसपास के हालात देख, हमने पुलिस कंट्रोल रूम को फोन किया। आधे घंटे में पुलिस आई और मरीजों द्वारा पकड़े गए सभी १२ लड़कों को पुलिस के हवाले कर दिया गया। रात में यहां सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है। अस्पताल में रात के वक्त कहां शिकायत करें इसकी भी कहीं कोई जानकारी नहीं है।
मो. सलाम
इराकी, मरीज अटेंडेंट
अभिभावकों के सामने डांट लगाई
पीएमसीएच इमरजेंसी से छह से सात लड़के पकड़े गए थे। सभी को थाने लाकर उनके अभिभावकों को बुलाया गया। बाद में डांट फटकार लगाकर छोड़ दिया गया। किसी ने कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई थी। निसार अहमद, थानाध्यक्ष, पीरबहोर
मुझे इसकी जानकारी नहीं है
देखिए अस्पताल परिसर में ऐसा कोई नहीं कर सकता। मुझे अभी इसकी कोई जानकारी नहीं है। मैं अपनी इलाज के लिए मुंबई गया हुआ था। पीएमसीएच में सुरक्षा के लिए हर शिफ्ट में गार्ड रखे गए हैं। लेकिन अगर किसी ने ऐसा कुछ किया है तो आप उपाधीक्षक सुधांशु सिंह से बातचीत कर लीजिए। लखेंद्र सिंह, अधीक्षक, पीएमसीएच
फोन उठाया, बात नहीं की
अधीक्षक के कहने पर हमने उपाधीक्षक सुधांशु सिंह से दस बार बात करने की कोशिश करनी चाही। लैंडलाइन और
मोबाइल से फोन करने पर हर बार उन्होंने फोन तो रिसीव किया, लेकिन बातचीत नहीं की।
यह सिस्टम का ही दोष है, माने पीएमसीएच
पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में पत्रकारों-छायाकारों को यथासंभव रोकने का प्रयास किया जाता है। अंदर की हकीकत कुछ ऐसी है, शायद इसलिए। इस तस्वीर में शराब का सेवन कर रहे युवकों के चेहरे इसलिए छिपाए गए हैं क्योंकि डीबी स्टार का उद्देश्य इन्हें परेशान करना नहीं, बल्कि पीएमसीएच की व्यवस्था को सुधारना है। ऐसी स्थितियों में अन्य मरीज-परिजन बहुत ज्यादा परेशानी झेलते हैं। इस बात को माने पीएमसीएच।