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450 जवान, 2 बुलडोजर और तोड़े सिर्फ 8 मकान, देखें कार्रवाई की PHOTOS

7 वर्ष पहले
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(हंगामे के दौरान एक युवक जख्मी हुआ तो पुलिस उसे अस्पताल ले गई।)
पटना सिटी. एनएमसीएच की जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए प्रशासनिक अधिकारी सोमवार को पूरी तैयारी से पहुंचे थे। 400 लाठी पार्टी, 50 महिला पुलिस बल व ब्रज वाहन, दो बुलडोजर के साथ स्थानीय थानों की प्रतिनियुक्ति भी की गई थी। सिटी एसपी शिवदीप लांडे भी स्थिति का जायजा ले रहे थे। जैसे ही अधिकारियों ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की, लोगों का विरोध तेज हो गया। आक्रोशित लोगों ने जगह-जगह सड़क जाम व आगजनी कर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया।
पुलिस बल के कॉलोनी में घुसते ही लोगों ने छातों से पथराव शुरू कर दिया। पुलिस ने इसके जवाब में विरोध कर रहे कुछ लोगों पर लाठियां चटकाईं। भीड़ को खदेड़ कर बमुश्किल सात-आठ मकान तोड़े। इस दौरान पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में लिया है।

सुबह करीब दस बजे ही काफी संख्या में पुलिस बल ने अतिक्रमित हटाने के लिए घेराबंदी कर ली थी। इसको देख कर पांच सौ से अधिक महिला व पुरुषों ने टायर जला कर आगजनी शुरू कर दी। अधिकारियों ने यह समझा-बुझा कर वहां से हटा दिया कि आप लोगों के लिए सरकार पुनर्वास की व्यवस्था करेगी। पुलिस ने आधा दर्जन लोगों को हिरासत में लिया है। लोगों का आरोप है कि पुलिस ने एक युवक उदय श्रीवास्तव को पीटा है। वह एनएमसीएच में भर्ती है।
मोहलत मांगी पर नहीं सुने
काफी संख्या में महिलाएं प्रशासनिक अधिकारियों के सामने छाती पीट-पीटकर कर रोने लगी। वह रहम व मोहलत की मांग कर रही थी। इस दौरान महिला आरक्षी ने एक महिला को चाटा मार दिया। इससे लोग आक्रोशित हो गए। दो बजे करीब कॉलोनी में एक बुलडोजर घुसा और निर्मला देवी के घेराबंदी गिरा दिया। इस दौरान बुलडोजर का पहिया पंचर होने से अभियान रुक गया। थोड़ी देर के बाद दूसरा बुलडोजर मंगाया गया। माले के कई नेता व जन मुक्ति मोर्चा के कार्यकर्ता मौके पर पहुंच अधिकारियों से बातचीत की।
1958 में जमीन अधिगृहीत की थी
एनएमसीएच की अधिगृहीत भूमि पर करीब 700 कच्चे व पक्के मकान बने हैं। हाईकोर्ट ने इस भूमि को अतिक्रमण मुक्त करने का निर्देश दिया है। इस संबंध में विकास चंद्र उर्फ गुड्‌डू बाबा ने पीआईएल दाखिल किया था। मेडिकल संस्थान को विकसित करने की योजना के तहत सरकार ने 1958-59 में भूमि अधिगृहीत की थी। गजट में भी इसका प्रकाशन हो चुका है। इसके बाद भी भू-माफिया ने जमीन पर दावेदारी बता कर दूसरे के हाथों बेच दिया है। करीब 88 एकड़ जमीन पर एक बड़ा हिस्सा तालाब भी है।
प्रशासन स्वतंत्र : हाईकोर्ट
एनएमसीएच परिसर से अतिक्रमण हटाने का रास्ता साफ हो गया। हाईकोर्ट ने साफ कर दिया कि एनएमसीएच के लिए अधिगृहीत 88 एकड़ जमीन पर से अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए जिला प्रशासन स्वतंत्र है। कोर्ट ने दो लोकहित याचिकाओं को खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति वीएन सिन्हा तथा न्यायमूर्ति पीके झा की खंडपीठ ने दिनेश कुमार उर्फ दिनेश मेहता तथा उदय कुमार श्रीवास्तव की लोकहित याचिकाओं पर सुनवाई के बाद अपना आदेश सुरक्षित कर लिया था, जिसे सोमवार को सुनाया।
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