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दिल की हर बीमारी का इलाज अब पटना में ही

7 वर्ष पहले
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पटना. दिल की बीमारी से पीडि़त मरीजों को इलाज के लिए अब भटकना नहीं पड़ेगा। एक छत के नीचे उन्हें जांच और इलाज की सारी सुविधाएं मिल जाएंगी। इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान को आधुनिक उपकरणों से लैस किया जाएगा। इसके लिए विभाग को प्रस्ताव भेजा गया है। यहां ऐसी मशीन लगाई जाएगी, जिससे एंजियोग्राफी के लिए चीर-फाड़ करने से निजात मिल जाएगी। पांच मॉड्यूलर ओटी, गामा कैमरा, कैथ लैब आदि की भी व्यवस्था होगी। सारी आधुनिक सुविधाएं नए भवन में मिलेंगी। दस मंजिले भवन का निर्माण चल रहा है। यह इस साल बन कर तैयार हो जाएगा। नए भवन में 250 बेड की व्यवस्था होगी। पुराने में 160 बेड हैं।

नए भवन में सुविधाएं जो मिलेंगी

256 स्लाइस सिटी एंजियो : इस मशीन से कोरोनरी आर्टरी में ब्लाकेज की जानकारी चंद मिनट में मिल जाती है। इसके लिए चीर-फाड़ नहीं करनी पड़ती। मरीज को किसी तरह की तकलीफ नहीं होती। इस जांच के बाद डॉक्टर को पता चल जाता है कि कितना ब्लॉकेज है। उसी अनुसार इलाज की प्रक्रिया शुरू होती है।

बाहर में जांच शुल्क : 10-15 हजार
गामा कैमरा : इससे स्ट्रेस थैलियम टेस्ट होता है। टीएमटी जांच कर जिस तरह से मरीज की बीमारी की स्थिति की जानकारी ली जाती है, उसी तरह इससे भी जानकारी ली जाती है। हालांकि ट्रेड मिल पर मरीज को कम और अधिक स्पीड पर दौडऩा पड़ता। पर, गामा कैमरा से जांच करने पर दौडऩे की जरूरत नहीं होती। बुजुर्ग टीएमटी को सक्षम नहीं होते। ऐसे लोगों की कैमरे से जांच की जाएगी।

बाहर में जांच शुल्क : 10-15 हजार
कलर डॉप्लर व थ्री-डी इकोकार्डियोग्राफी : कम से कम तीन और थ्री डी इकोकार्डियोग्राफी मशीन की व्यवस्था नए भवन में होगी। साथ में कलर डॉप्लर की भी सुविधा होगी। अभी इको के लिए मरीजों को दो से तीन महीने तक इंतजार करना पड़ता है।

सीसीयू : कोरोनरी कार्डिएक यूनिट में और 50 बेड की सुविधा होगी। अभी 30 बेड हैं।
ईपीएस मशीन : दिल की धड़कन की जानकारी के लिए इलेक्ट्रो फिजियोलॉजिकल स्टडी की जाती है।
बाहर में जांच शुल्क : 15 हजार

हर सुविधा मिलेगी
आधुनिक मशीनों के लिए प्रस्ताव भेज दिया गया है। सभी मशीनें नए भवन में लगेंगी। इस साल तक नए भवन में मरीजों को सारी सुविधाएं उपलब्ध कराने की कोशिश कर रहे हैं। दिल की बीमारी से पीडि़त मरीज को बाहर जाने की जरूरत नहीं होगी।
डॉ. हरेन्द्र कुमार, प्रभारी निदेशक, इंदिरागांधी हृदय रोग संस्थान